शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सुक्खू सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। स्कूलों के विलय के बाद अब सरकार कॉलेजों के पुनर्गठन की तैयारी में है। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों को नजदीकी संस्थानों में मर्ज किया जाएगा, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

75 छात्रों की शर्त, कम संख्या वाले कॉलेज होंगे मर्ज

सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए स्पष्ट मानदंड तय किया है। जिन कॉलेजों में 75 से कम छात्र पढ़ रहे हैं, उन्हें पहले चरण में विलय किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसे संस्थानों को अलग-अलग चलाने से संसाधनों का बंटवारा होता है और शिक्षकों की उपलब्धता भी प्रभावित होती है।

 

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छात्रों के लिए बड़ा ऐलान, 5 हजार रुपये स्टाइपंड

इस फैसले के साथ सरकार ने छात्रों के हित में एक बड़ी घोषणा भी की है। जिन कॉलेजों का विलय किया जाएगा, वहां पढ़ने वाले छात्रों को यदि जिला मुख्यालय के कॉलेजों में दाखिला लेना पड़ता है, तो उन्हें हर महीने 5 हजार रुपये स्टाइपंड दिया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को आर्थिक सहायता देना और उनकी पढ़ाई को बिना रुकावट जारी रखना है।

 

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नजदीकी कॉलेज में भी मिलेगा विकल्प

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जो छात्र जिला मुख्यालय नहीं जाना चाहते, उन्हें नजदीकी कॉलेजों में एडमिशन का विकल्प दिया जाएगा। इससे छात्रों को अपने क्षेत्र के आसपास ही पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिलेगी।

 

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पहले चरण में कई कॉलेज शामिल

पहले चरण में करीब 10 कॉलेजों को मर्ज करने की योजना है। इनमें शिमला, मंडी, कांगड़ा, चंबा, सोलन और लाहुल-स्पीति जिलों के कई कॉलेज शामिल हो सकते हैं, जहां छात्र संख्या काफी कम है।

शिक्षकों का भी होगा पुनर्स्थापन

विलय के बाद इन कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि उनकी सेवाओं का बेहतर उपयोग हो सके।

नए सत्र से लागू होगी व्यवस्था

सरकार इस पूरी प्रक्रिया को आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी में है। साथ ही कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम को भी लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित किया जा सके। यह फैसला जहां एक ओर शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए बदलाव लेकर आने वाला है।

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