शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में कई बड़े और दूरगामी प्रभाव वाले फैसलों पर मुहर लगाई गई। स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, स्वरोजगार, पशुपालन और राजस्व से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने आम जनता को राहत देने की कोशिश की है। कैबिनेट की इस बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा हिमकेयर योजना के दायरे को बढ़ाने और चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को विनियमित करने संबंधी फैसलों की रही।

हिमकेयर योजना में मरीजों को बड़ी राहत

प्रदेश सरकार ने हिमकेयर योजना को नए स्वरूप में लागू करने का फैसला लिया है। अब इस योजना को बीमा मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। संशोधित व्यवस्था के अनुसार पात्र परिवारों को पहले की तुलना में अधिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

 

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सरकार ने स्वास्थ्य बीमा कवर की सीमा बढ़ाते हुए इसे 7 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक करने का निर्णय लिया है। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में यह फैसला प्रदेश सरकार के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में माना जा रहा है।

भांग की खेती के लिए नियमों में होगा बदलाव

कैबिनेट बैठक में एक और अहम निर्णय लेते हुए हिमाचल प्रदेश एनडीपीएस नियम, 1989 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार ने चिकित्सा और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती, प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन को विनियमित करने का रास्ता साफ किया है। सरकार का मानना है कि नियंत्रित और कानूनी ढांचे के तहत इस क्षेत्र में नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए कड़े नियम और निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।

 

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सरकारी भूमि पर कब्जाधारकों को राहत

कैबिनेट ने भूमिहीन परिवारों और छोटे किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण नीति को भी मंजूरी दी है। नई नियमितीकरण नीति के तहत आवास, खेती और बागवानी के लिए उपयोग की जा रही 20 बीघा तक सरकारी भूमि को नियमित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह नीति मानवीय आधार पर तैयार की गई है और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बनाई गई है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।

स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के चौथे चरण को मंजूरी दी है। योजना के तहत ई-बस खरीदने वाले पात्र लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक और डीजल बस खरीदने वालों को 30 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

 

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भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को राहत

मंत्रिमंडल ने भर्ती निदेशालय में वर्क इंस्पेक्टर के 400 पद भरने की मंजूरी प्रदान की है। वहीं पूर्व हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग द्वारा जारी 80 पोस्ट कोड के विज्ञापनों को वापस लेने और अभ्यर्थियों को लगभग 4.27 करोड़ रुपये की परीक्षा फीस लौटाने का भी फैसला लिया गया है। यह निर्णय लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े उम्मीदवारों की मांगों को देखते हुए लिया गया है।

पशुपालकों और गद्दी समुदाय के लिए नई व्यवस्था

प्रदेश के पशुपालकों और गद्दी समुदाय को राहत देते हुए सरकार ने ग्रेजिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत वन विभाग और पशुपालन विभाग मिलकर एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेंगे, जिससे चराई के लिए आवश्यक परमिट रियल टाइम में जारी किए जा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे पारंपरिक पशुपालन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।

 

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अग्निकांड प्रभावित परिवारों को विशेष सहायता

शिमला जिले के जुब्बल, कोटखाई और रोहड़ू क्षेत्रों में आगजनी से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी गई है। जिन परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें सात-सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को भी मिला बल

कैबिनेट ने विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को अपग्रेड करने के फैसले भी लिए हैं। सरकाघाट अस्पताल की क्षमता बढ़ाने, बद्दी अस्पताल को 200 बिस्तरों वाले संस्थान में विकसित करने और नए स्वास्थ्य केंद्र खोलने को मंजूरी दी गई है। साथ ही विभिन्न पदों के सृजन और भर्ती का रास्ता भी साफ किया गया है।

मेलों को मिला नया दर्जा

बैठक में सोलन जिले के राज्य स्तरीय शूलिनी मेले को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा प्रदान करने तथा चंबा जिले के छतराड़ी स्थित मां शिव शक्ति जातर मेले, कांगड़ा जिले के इंदौरा स्थित शिवरात्री मेले काठगढ़ को राज्य स्तरीय मेले का दर्जा देने को स्वीकृति प्रदान की। मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिले के मेले नेरटी रैत, सोलन के अर्की तहसील के बाड़ीधार मेले सरयांज, चंबा के छिंज मेले गरनोटा तथा मंडी के करसोग तहसील के नाहवीधार मेले को जिला स्तरीय मेले का दर्जा देने को मंजूरी दी।

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