#विविध
July 21, 2026
हिमाचल में अब खड्ड के ऊपर दौड़ेगा हवाई जहाज! कांगड़ा में बनेगा देश का दूसरा अनूठा एयरपोर्ट
चेन्नई के बाद हिमाचल में खड्ड के ऊपर तैयार होगी हवाई पट्टी
शेयर करें:

धर्मशाला। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश जल्द ही सिविल इंजीनियरिंग का ऐसा अद्भुत नमूना देखने को मिलेगा, जिसे देश के सबसे अनोखे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गिना जाएगा। कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट के विस्तार के तहत मांझी खड्ड के ऊपर विशेष संरचना पर रनवे तैयार करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद ऐसा नजारा देखने को मिलेगा जब बड़े-बड़े विमान खड्ड के ऊपर बने रनवे पर दौड़ते नजर आएंगे। यह केवल एक एयरपोर्ट विस्तार परियोजना नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग, तकनीकी कौशल और पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का ऐतिहासिक उदाहरण माना जा रहा है।
यदि परियोजना निर्धारित स्वरूप में पूरी होती है तो गगल एयरपोर्ट देश का दूसरा ऐसा हवाई अड्डा बन जाएगा, जहां नदी या खड्ड के ऊपर विशेष संरचना पर रनवे विकसित किया जाएगा। वहीं हिमालयी और अन्य पहाड़ी राज्यों में यह अपनी तरह की पहली परियोजना होगी। इससे पहले भारत में नदी के ऊपर रनवे का प्रमुख उदाहरण चेन्नई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप में सबके सामने है। यहां पर रनवे अडयार नदी के ऊपर बना हुआ है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में बादल फटने से हाहाकार : बाढ़ में बहे कई मकान, लोगों की चीखों से दहला इलाका
परियोजना के तहत मांझी खड्ड के ऊपर लगभग 380 मीटर लंबा विशेष रनवे ब्रिज बनाया जाएगा। यह कोई साधारण पुल नहीं होगा, बल्कि इसे इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि इसके ऊपर विमान सुरक्षित रूप से टेकऑफ और लैंडिंग कर सकें। इस संरचना को बड़े विमानों के वजन, तेज गति, कंपन, भूकंपीय गतिविधियों और बरसात के दौरान खड्ड में आने वाले भारी जलप्रवाह को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा।
इंजीनियरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड्ड के ऊपर ऐसी संरचना तैयार करना है जो वर्षों तक सुरक्षित और मजबूत बनी रहे। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना इंजीनियरिंग, भूगर्भीय अध्ययन और विमानन सुरक्षा का एक बेहतरीन संगम साबित होगी। निर्माण कार्य के दौरान प्रत्येक तकनीकी पहलू की गहन निगरानी की जाएगी।
वर्तमान में रनवे की सीमित लंबाई के कारण गगल एयरपोर्ट पर बड़े आकार के विमानों का संचालन सीमित है। लेकिन रनवे विस्तार के बाद स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। नई हवाई पट्टी बनने से अधिक क्षमता वाले विमान भी यहां सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकेंगे। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि प्रदेश की हवाई पहुंच भी काफी मजबूत होगी।
कांगड़ा घाटी, धर्मशाला, मैक्लोडगंज, पालमपुर, बीड़-बिलिंग और आसपास के पर्यटन स्थलों को इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर हवाई संपर्क के कारण देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना हिमाचल के पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
एयरपोर्ट विस्तार परियोजना का प्रभाव केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। इससे होटल उद्योग, टैक्सी व्यवसाय, पर्यटन सेवाएं, स्थानीय व्यापार और अन्य संबंधित क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, जबकि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश सरकार और संबंधित एजेंसियां इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण, तकनीकी सर्वेक्षण और अन्य तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। प्रशासन का दावा है कि परियोजना के हर चरण पर विशेषज्ञों की निगरानी रखी जा रही है ताकि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो सके।
मांझी खड्ड के ऊपर बनने वाला यह रनवे केवल एक तकनीकी संरचना नहीं होगा, बल्कि हिमाचल प्रदेश की नई पहचान के रूप में भी उभर सकता है। जिस तरह कुछ बड़े एयरपोर्ट अपनी विशिष्ट बनावट के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं, उसी तरह गगल एयरपोर्ट भी भविष्य में अपनी अनोखी संरचना और इंजीनियरिंग कौशल के लिए जाना जा सकता है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो आने वाले वर्षों में हिमाचल के लोग और पर्यटक एक ऐसा दृश्य देखेंगे, जहां विशाल विमान खड्ड के ऊपर बने रनवे पर दौड़ते हुए आसमान की ओर उड़ान भरते नजर आएंगे—एक ऐसा दृश्य जो आज कल्पना जैसा लगता है, लेकिन जल्द ही हकीकत बन सकता है।