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June 6, 2026
सुक्खू सरकार ने 10 कॉलेजों पर जड़ दिया ताला, यहां के छात्रों को प्रतिमाह देंगे 5 हजार रुपए; पर रखी है ये शर्त
सुक्खू सरकार बंद कॉलेजों के दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों को देगी आर्थिक सहायता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने कम छात्र संख्या वाले 10 सरकारी डिग्री कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लागू कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद इन कॉलेजों में अब नए विद्यार्थियों के दाखिले नहीं होंगे। वहीं, इन संस्थानों में पहले से पढ़ रहे छात्रों को राहत देने के लिए सरकार ने विशेष वित्तीय सहायता योजना भी शुरू की है।
सरकार ने घोषणा की है कि प्रभावित कॉलेजों के दूसरे और तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रतिमाह 5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि इसके लिए छात्रों को सरकार द्वारा निर्धारित कॉलेजों में ही अपना दाखिला स्थानांतरित करना होगा।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के 10 सरकारी कॉलेजों में नए प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम थी, जिसके चलते संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था।
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बंद किए गए कॉलेजों में टिक्कर, भलेई, कुकुमसेरी, कुपवी, संधोल, मुल्थान, जैनगर, ननखड़ी, रोनहाट और कोटली डिग्री कॉलेज शामिल हैं। इन संस्थानों को नजदीकी बड़े सरकारी कॉलेजों के साथ मर्ज किया गया है।
कॉलेजों के विलय के कारण छात्रों को दूसरे शहरों या बड़े शिक्षण संस्थानों में जाना पड़ेगा। ऐसे में आवास, परिवहन और अन्य खर्चों का अतिरिक्त बोझ विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर न पड़े, इसके लिए सरकार ने मासिक स्टाइपेंड देने का फैसला किया है।
प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को हर महीने 5 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। यह सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जो सरकार द्वारा निर्धारित मर्ज किए गए कॉलेजों में अपना प्रवेश लेंगे। यदि कोई छात्र किसी अन्य संस्थान में दाखिला लेता है तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
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उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि दूसरे और तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों की विशेष काउंसलिंग की जाए। विद्यार्थियों को नए कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया, विषय चयन और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरअसल राज्य सरकार ने कॉलेजों के विलय का निर्णय पिछले वर्ष ही ले लिया था, लेकिन उस समय शैक्षणिक सत्र चल रहा था और विभिन्न स्तरों पर इसका विरोध भी हुआ था। इसी वजह से सरकार ने निर्णय को तत्काल लागू नहीं किया। अब नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होने से पहले इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
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सरकार के इस निर्णय के बाद कई सवाल भी सामने आने लगे हैं। अब तक ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थी अपने घरों के नजदीक स्थित कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन कॉलेज बंद होने के बाद उन्हें लंबी दूरी तय करके अन्य संस्थानों तक जाना होगा।
विशेष रूप से लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी कॉलेज के छात्रों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए कुल्लू जैसे दूसरे क्षेत्र में जाना पड़ सकता है। वहीं इन कॉलेजों के लिए करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए भवनों और अन्य आधारभूत सुविधाओं के भविष्य को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
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राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार के अनुसार कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों को बड़े संस्थानों के साथ जोड़ने से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।