शिमला। हिमाचल में सालों से सरकार द्वारा मिलने वाली सस्ती राशन में आए दिन कोई घोटाले देखने को मिलते ही रहते हैं। कभी मृतकों के नाम पर राशन लिया जाता है तो कभी फेक BPLश्रेणी में अपना नाम डलवाकर राशन लिया जाता है। ऐसे में अब सरकार की सस्ती राशन योजनाओं पर टिके लाखों परिवार अब बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। अंत्योदय, बीपीएल और पीएचएच कार्ड के सहारे डिपो से सस्ती खाद्य सामग्री लेने वाले 5.71 लाख राशन कार्ड धारक अब नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) की सूची से बाहर होने जा रहे हैं।
सिर्फ पात्र परिवार को मिलेगा सस्ते राशन का लाभ
केंद्र सरकार ने पहली बार ऐसे कड़े मानदंड लागू किए हैं, जिनके आधार पर सिर्फ वही लोग सस्ता राशन पाएंगे, जो वास्तव में इसके पात्र हैं। इसी वजह से अब पंचायत सचिव घर-घर जाकर कार्डों का मिलान कर रहे हैं।
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5.71 लाख कार्ड धारक बाहर
हिमाचल में लगभग साढ़े 19 लाख राशन कार्ड हैं, जिनमें से करीब साढ़े 7 लाख NFSA के तहत आते हैं। लेकिन नए नियमों ने एक ही झटके में इनमें से 5.71 लाख कार्डों को बाहर कर दिया।यानी हिमाचल के लाखों परिवारों के लिए सस्ता राशन अब बीते दिनों की बात हो सकता है।
APL में शिफ्ट होंगे परिवार
केंद्र सरकार के नए मानदंडों के बाद हिमाचल में एनएफएसए की श्रेणी से 5.71 लाख कार्ड धारक बाहर होने जा रहे हैं। इन्हें अब APL श्रेणी में डाला जाएगा, जहां उन्हें बाजार दर के बराबर ही राशन मिलेगा, सब्सिडी नहीं।
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डिपो संचालकों पर डबल मार- कम होगा कमीशन
डिपो संचालकों के लिए यह फैसला बड़ा झटका साबित होने वाला है।
- एनएफएसए कार्ड पर कमीशन: 143 रु/क्विंटल
- APL कार्ड पर कमीशन: सिर्फ 4%
पहले ही घाटे में चल रहे और किराया-बिजली का खर्च खुद उठाने वाले डिपो चलाने वालों की आमदनी अब और घट जाएगी। लगभग 5200 डिपो संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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डिपो संचालकों की मांग अभी भी अधूरी
सरकार बनने से पहले हुए बड़े कार्यक्रम में डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने वादा किया था कि डिपो संचालकों की मांगें पूरी होंगी। लेकिन तीन साल बीत गए वेतन बढ़ा, ना कोई राहत मिली। बता दें कि डिपो संचालकों द्वारा 20 हजार वेतन की मांग सरकार से रखी गई थी।
85% एनएफएसए कार्ड बदल जाएंगे
- डिपो संचालक समिति के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कवि के मुताबिक
- केंद्र के नए मानदंडों के बाद 85% एनएफएसए कार्डों की श्रेणी बदलेगी।
- इससे डिपो संचालकों और सहकारी सभाओं के कमीशन में भारी कटौती होगी।
- हजारों परिवारों के लिए राशन महंगा हो जाएगा।
पंचायत सचिव काम पर जुटे
राज्यभर में पंचायत सचिव कार्डधारकों की आय, परिवार संख्या और पात्रता की जांच कर रहे हैं। इसी आधार पर तय होगा कौन सस्ते राशन का हकदार रहेगा।
NFSA (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) क्या है?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम यानी NFSA सरकार द्वारा 2013 में लागू किया गया एक कानून है, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सब्सिडी वाले अनाज सस्ते दामों पर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह सुविधा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से दी जाती है।
NFSA कार्ड क्या होता है?
NFSA कार्ड एक सरकारी दस्तावेज़ है जिसके जरिए पात्र परिवार सरकारी डिपो से अनाज कम कीमत पर खरीद सकते हैं।
यह कार्ड दो श्रेणियों में बांटा गया है:
1. अंत्योदय अन्न योजना (AAY)
- यह कार्ड समाज के सबसे गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों को दिया जाता है।
- प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह मिलता है।
- यह लाभ परिवार के सदस्यों की संख्या पर निर्भर नहीं होता- पूरे परिवार के लिए एक निश्चित कोटा दिया जाता है।
2. प्राथमिकता घरेलू (PHH)
यह कार्ड उन परिवारों को मिलता है जो AAY की श्रेणी में नहीं आते, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
- प्रति सदस्य 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह मिलता है।
- यानी परिवार जितना बड़ा होगा, उतना अधिक खाद्यान्न मिलेगा।
