शिमला। हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से अटके पंचायत चुनावों को लेकर अब स्थिति तेजी से बदलती नजर आ रही है। आरक्षण रोस्टर को लेकर चल रहा इंतजार अब खत्म होने वाला है।
आज नए सिरे से जारी होगा रोस्टर
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों के उपायुक्तों को आज शाम 5 बजे तक हर हाल में पंचायत चुनावों का आरक्षण रोस्टर जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और सभी जिलों में अंतिम तैयारियां की जा रही हैं।
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नया मोड़ आया सामने
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तय समयसीमा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ताकि चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कोई बाधा न आए। हालांकि, इस पूरे मामले में एक नया मोड़ भी सामने आया है।
DC की शक्तियों पर रोक
कुछ जिलों में उपायुक्तों ने बीते सोमवार को ही आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया था, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दी गई 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण तय करने की शक्तियों का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने इस प्रावधान को गैरकानूनी मानते हुए तत्काल प्रभाव से इस पर रोक लगा दी है।
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क्यों नए सिरे से जारी होगा रोस्टर?
इस फैसले के बाद उन जिलों में अब पहले से जारी रोस्टर अमान्य हो गए हैं और प्रशासन को पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ेगी। यानी, अब नए सिरे से नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा, जिससे चुनावों में पारदर्शिता बनी रहे।
समयसीमा बना दबाव का बड़ा कारण
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनावों की समयसीमा भी एक अहम मुद्दा बन गई है। सप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि राज्य में पंचायत और नगर निकाय चुनाव 31 मई से पहले हर हाल में कराए जाएं।
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इससे राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश स्टेर इलेक्शन कमीशन पर समयबद्ध तरीके से सभी प्रक्रियाएं पूरी करने का दबाव बढ़ गया है। अब आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा संभव हो पाएगी।
73 नगर निकायों में भी एक साथ होंगे चुनाव
पंचायत चुनावों के साथ ही प्रदेश के 73 नगर निकायों में भी चुनाव कराए जाने प्रस्तावित हैं। फिलहाल इन सभी संस्थाओं में सरकार ने प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं, क्योंकि नगर निकायों का कार्यकाल 17 जनवरी 2026 और पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है।
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उस समय राज्य चुनाव आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार था, लेकिन राज्य सरकार ने आपदा की स्थिति का हवाला देते हुए चुनाव टाल दिए थे। अब अदालत के सख्त निर्देशों के बाद चुनाव टालना संभव नहीं दिख रहा।
HC और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बीच संतुलन
पहले हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल, 2026 तक चुनाव करवाने के निर्देश दिए थे। मगर राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने की अतिरिक्त मोहलत देते हुए 31 मई तक चुनाव कराने की अंतिम समयसीमा तय कर दी।
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नियमों में बदलाव करने की कोशिश
हालांकि, इस दौरान राज्य सरकार ने आरक्षण रोस्टर के नियमों में बदलाव करने की कोशिश की, जिस पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। इससे साफ है कि अदालतें इस पूरे मामले में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर बेहद गंभीर हैं।
अब आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आज शाम तक जिलों में आरक्षण रोस्टर किस रूप में जारी होता है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया की अगली कड़ी जैसे अधिसूचना जारी करना, नामांकन और मतदान की तारीखें तय करना शुरू हो पाएंगी।
