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April 6, 2026
हिमाचल: ट्रांसपोर्टर की हड़ताल ने बिगाड़े हालात, वाहनों के थमे पहिये; लोगों को झेलनी पड़ी परेशानी
निजी स्कूलों में छुट्टी, समय पर काम पर नहीं पहुंच पाए लोग
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सोमवार को सड़कों पर मानो रफ्तार थम सी गई। कमर्शियल वाहन ऑपरेटरों की हड़ताल का असर इतना व्यापक रहा कि बसें] टैक्सियां और अन्य निजी वाहन सड़कों से गायब दिखे। नतीजतन स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों से लेकर रोजमर्रा के काम पर निकलने वाले लोगों तक को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पूरे दिन लोग जगह-जगह वाहनों का इंतजार करते नजर आए और जनजीवन काफी हद तक प्रभावित रहा।
दरअसल, कमर्शियल वाहन ऑपरेटर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) सिस्टम के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। इसी के विरोध में उन्होंने चक्काजाम और हड़ताल का ऐलान किया, जिसके चलते सुबह से ही जिलेभर में वाहनों के पहिये थम गए। ऑपरेटरों का कहना है कि नई पासिंग व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है और इससे उन्हें बार-बार परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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हड़ताल का सबसे ज्यादा असर शिक्षा व्यवस्था पर देखने को मिला। निजी स्कूलों की बसें नहीं चलने के कारण कई स्कूलों को छुट्टी घोषित करनी पड़ी। छात्र-छात्राओं को घरों में ही रहना पड़ा, जिससे अभिभावकों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
धर्मशाला, गगल, रैत, देहरा, पालमपुर और बैजनाथ सहित कई क्षेत्रों में ऑपरेटर सड़कों पर उतर आए। मंडी-पठानकोट हाईवे पर भी कई जगह वाहनों को रोका गया। धर्मशाला में ऑपरेटर महात्मा गांधी स्मृति वाटिका में एकत्र हुए और कचहरी तक आक्रोश रैली निकालकर धरना दिया। देहरा में हनुमान चौक और व्यास पुल के पास प्रदर्शन और नारेबाजी हुई, जबकि पालमपुर में लगभग सभी प्रमुख चौराहों पर ऑपरेटरों ने विरोध जताया। बैजनाथ में भी रैली निकालकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।
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प्रदर्शन के दौरान कई जगह निजी बसों को रोका गया। इतना ही नहीं, दूध और ब्रेड जैसी जरूरी सप्लाई लेकर जा रही गाड़ियों को भी रोकने की कोशिश की गई, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सीमित संख्या में बसें चलती रहीं।
रैत के पास चंबी में प्रदर्शन के दौरान ऑपरेटरों ने विधायक केवल सिंह पठानिया के स्टाफ को ले जा रहे वाहन को भी रोक दिया। इस दौरान मौके पर कुछ देर के लिए गहमागहमी का माहौल बना रहा, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
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ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि ATS सिस्टम में छोटी-छोटी खामियों के कारण वाहनों को बार-बार टेस्टिंग के लिए भेजा जा रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है। उन्होंने मांग की है कि पहले की तरह मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर द्वारा की जाने वाली पासिंग व्यवस्था को बहाल किया जाए।
हड़ताल के दौरान एंबुलेंस और मरीजों को ले जाने वाले वाहनों को छूट दी गई, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों। हालांकि अन्य सामान्य यातायात काफी हद तक बाधित रहा।
आंदोलन को प्रदेशभर में फैलाने की चेतावनी ऑपरेटर यूनियनों ने साफ कहा है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ है। यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।
बता दें कि केंद्र सरकार के निर्देशों पर वाहनों की फिटनेस जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। अब वाहनों की पासिंग इसी सिस्टम के जरिए की जा रही है। हालांकि ट्रांसपोर्टर इस नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर अव्यवहारिक बताते हुए इसके खिलाफ लामबंद हो गए हैं।
हड़ताल के चलते पूरे जिले में जनजीवन प्रभावित रहा। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा, कई यात्राएं रद्द करनी पड़ीं और रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ा। अब सबकी नजरें सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, ताकि इस समस्या का जल्द समाधान निकल सके।