कांगड़ा। जहां एक ओर खेतों में आधुनिक मशीनरी की बढ़ती कीमतें छोटे किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर एक स्कूली छात्र ने सीमित साधनों में बड़ी सोच का परिचय देकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

12वीं के छात्र का कमाल

आपको बता दें कि राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कांगड़ा के बारहवीं कक्षा के छात्र लक्ष्मण ने कबाड़ समझी जाने वाली वस्तुओं से पेट्रोल चालित ट्रैक्टर तैयार किया है। लक्ष्मण ने ऐसा कर के ये यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।

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कबाड़ से बनाया ट्रैक्टर

पुराने वाहनों के इंजन, बेकार पड़ी लोहे की चादरें, जंग खाए ऑटो पार्ट्स और अनुपयोगी धातुओं को इकट्ठा कर उन्होंने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है- जो कार्यशील है और छोटे किसानों के लिए कम लागत का व्यवहारिक विकल्प बन सकता है।

 

कैसे आया छात्र को आइडिया?

लक्ष्मण ने बताया कि शुरुआत में यह विचार केवल एक प्रायोगिक मॉडल तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे उपयोगी बनाने की दिशा में काम किया। इंजन की मरम्मत से लेकर चेसिस तैयार करने तक हर चरण में उन्होंने खुद मेहनत की।

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कई बार मिली असफलता, नहीं मानी हार

कई बार असफलताएं भी मिलीं कभी इंजन स्टार्ट नहीं हुआ, तो कभी संतुलन बिगड़ गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका मानना है कि गांवों में अक्सर पुराने वाहन और मशीनों के हिस्से बेकार पड़े रहते हैं। अगर उन्हें तकनीकी समझ के साथ जोड़ा जाए तो वे दोबारा उपयोग में लाए जा सकते हैं। इसी सोच ने इस नवाचार को जन्म दिया।

किसानों के आएगा काम

आज खेती में मशीनों का प्रयोग आवश्यक हो गया है, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगे ट्रैक्टर खरीद पाना आसान नहीं होता। लक्ष्मण का यह मॉडल कम लागत में खेत जोतने, हल चलाने और अन्य हल्के कृषि कार्यों में मददगार साबित हो सकता है।

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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम

यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक कदम है, क्योंकि इससे कबाड़ का फिर से उपयोग संभव हुआ है। कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग के महत्व को भी इस प्रोजेक्ट ने व्यवहारिक रूप से सामने रखा है।

व्यावसायिक शिक्षा की सार्थकता

यह प्रोजेक्ट दर्शाता है कि स्कूलों में दी जा रही व्यावसायिक शिक्षा अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रही। प्रयोगात्मक शिक्षा से छात्रों में व्यावहारिक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित हो रही है।

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लक्ष्मण की सफलता से शिक्षक खुश

ऑटोमोबाइल प्रशिक्षक रविंद्र सिंह ने बताया कि लक्ष्मण शुरू से ही जिज्ञासु और मेहनती छात्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रोजेक्ट विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।

इंजीनियर बनना चाहता है लक्ष्मण

लक्ष्मण का सपना है कि वह आगे चलकर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करे और ऐसे उपकरण विकसित करे जो ग्रामीण भारत के लिए उपयोगी हों। लक्ष्मण का कहना है कि सही मंच और प्रोत्साहन मिलने से हर बच्चा क्रांतिकारी उपकरण बना सकता है।

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लक्ष्मण पर पूरे स्कूल को गर्व

लक्ष्मण की इस उपलब्धि पर पूरे स्कूल गर्व व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह युवा प्रतिभा आने वाले समय में क्षेत्र का नाम रोशन करेगी। एक साधारण से स्कूल की कार्यशाला में तैयार हुआ यह ट्रैक्टर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि यह संदेश है कि कल्पना, परिश्रम और सही मार्गदर्शन से असंभव भी संभव बनाया जा सकता है।

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