शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब सड़क हादसों और प्राकृतिक आपदा में मौत होने पर  मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपए की राहत राशि मिलेगी। इससे पहले मृतकों के परिवारों को चार लाख रुपए दिए जाते थे। लेकिन अब केंद्र की मोदी सरकार नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। जिसका फायदा पूरे देश सहित हिमाचल को भी मिलेगा। 

मोदी सरकार बदल रही आपदा राहत मैनुअल

दरअसल केंद्र की मोदी सरकार आपदा राहत मैनुअल में बड़े संशोधन की तैयारी कर रही है, जिसके बाद राहत और मुआवजा राशि में भारी बढ़ोतरी होगी। खास बात यह है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों को मिलने वाला है, जहां हर साल सड़क हादसों और प्राकृतिक आपदाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है।

 

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हिमाचल के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी और दुर्गम सड़कें होने के कारण सड़क हादसे आम बात हैं। वहीं मानसून सीजन में बादल फटना, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और पहाड़ दरकने जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। हिमाचल में सड़क दुर्घटनाओं को पहले से ही आपदा श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में यदि नया राहत मैनुअल लागू होता है तो सड़क हादसे में मौत होने पर भी मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की राहत राशि मिलेगी।

 

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अब तक ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार की ओर से 4 लाख रुपये की सहायता राशि निर्धारित थी, लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद यह राशि ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ जाएगी। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे हिमाचल के लिए “संजीवनी” जैसा फैसला माना जा रहा है।

आशियाने और पशुधन नुकसान पर भी छप्परफाड़ राहत

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी (एनडीएमए) द्वारा तैयार किए जा रहे इस नए प्रस्तावित मैनुअल में न केवल व्यक्तिगत जान के नुकसान, बल्कि संपत्ति और आशियाने के उजड़ने पर भी राहत राशि में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जा रही है:

 

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  • पूरी तरह ध्वस्त घरों के लिए: पहले जहां प्राकृतिक आपदा में घर पूरी तरह टूट जाने पर महज 1.30 लाख रुपये की मामूली केंद्रीय सहायता मिलती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर सीधा 4.30 लाख रुपये किया जा रहा है।

  • आंशिक नुकसान पर राहत: घरों को होने वाले आंशिक या कम नुकसान पर मिलने वाली सहायता राशि को 6500 रुपये के ऊंट के मुंह में जीरे के समान बजट से बढ़ाकर अब सीधे 1.12 लाख रुपये किया जा रहा है।

  • पशुधन के नुकसान पर बड़ी मदद: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की रीढ़ माने जाने वाले दुधारू पशुओं (गाय या भैंस) की हानि होने पर अब पशुपालकों को 37 हजार रुपये के बदले 73 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।

राज्यों से लिए गए सुझाव

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी National Disaster Management Authority ने इस नए राहत मैनुअल को तैयार करने के लिए विभिन्न राज्यों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। हिमाचल प्रदेश सहित कई पहाड़ी राज्यों ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि वर्तमान राहत राशि वास्तविक नुकसान की तुलना में काफी कम है और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। राज्यों ने बादल फटना, जंगल की आग, शहरी बाढ़ और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों के लिए अलग राहत प्रावधान बनाने की भी मांग रखी है।

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डिजिटल सर्वे और DBT से मिलेगी राहत

नए मैनुअल में राहत वितरण प्रक्रिया को और तेज और पारदर्शी बनाने की भी तैयारी है। बताया जा रहा है कि नुकसान के आकलन के लिए ड्रोन सर्वे और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं राहत राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजी जाएगी। इसके अलावा पंचायतों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका को भी अधिक मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि आपदा के समय लोगों तक जल्दी सहायता पहुंच सके।

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हिमाचल सरकार पहले भी बढ़ा चुकी है मदद

हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्य सरकार ने केंद्र की निर्धारित राशि से अधिक सहायता दी थी। कई मामलों में घर पूरी तरह टूटने पर राज्य सरकार ने 7 लाख रुपये तक का पैकेज प्रदान किया था। हालांकि व्यक्तिगत मृत्यु पर राहत राशि अब तक 4 लाख रुपये ही दी जा रही थी, लेकिन केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर 10 लाख रुपये हो जाएगी। अब अंतिम मसौदे को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

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