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May 17, 2026
हिमाचल : पंचतत्व में विलीन हुए अभिषेक, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि- दो साल पहले ही हुई थी शादी
दो साल पहले हुई थी शादी
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत टपरे के गांव नोहगी में रविवार को उस समय माहौल बेहद गमगीन हो गया, जब जवान अभिषेक कुमार की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटकर उनके घर पहुंची। बेटे को इस हालत में देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।
कुछ देर तक पार्थिव देह को घर के आंगन में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोग जवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान “भारत माता की जय” और “तेरा वैभव अमर रहे मां” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। जवान के बड़े भाई अरुण ने उन्हें मुखाग्नि दी।
जानकारी के मुताबिक अभिषेक कुमार काला पीलिया बीमारी से पीड़ित थे। उनका इलाज दिल्ली के RR अस्पताल में चल रहा था, जहां शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। वह सिर्फ 26 साल के थे। बताया जा रहा है कि अभिषेक कुमार साल 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। पिछले साल 2024 में उनकी शादी हुई थी। जवान के असमय निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं पूरे गांव में शोक की लहर है।
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सबसे भावुक बात यह है कि अभिषेक कुमार महज एक माह पहले ही छुट्टियां बिताकर अपने घर से ड्यूटी के लिए रवाना हुआ था। परिवार को क्या पता था कि बेटे की वह छुट्टी उसकी जिंदगी की आखिरी छुट्टी साबित होगी और अगली बार वह तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा।
जानकारी के अनुसार अभिषेक कुमार छुट्टी पूरी करने के बाद वापस हरियाणा के हिसार स्थित अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्हें खून की उल्टियां और लगातार दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद तुरंत उनका इलाज शुरू करवाया गया। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि जवान काला पीलिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित आरआर अस्पताल रेफर किया गया, जहां पिछले कुछ दिनों से उनका उपचार चल रहा था।

डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार सुबह अभिषेक कुमार जिंदगी की जंग हार गए। जवान के निधन की सूचना जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस खबर से स्तब्ध हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अभिषेक बेहद मिलनसार और मेहनती स्वभाव के थे। कम उम्र में ही उन्होंने सेना में भर्ती होकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया था।
अभिषेक कुमार के निधन ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे दुख में डाल दिया है। जिस बेटे को परिवार ने हंसते हुए ड्यूटी पर विदा किया था, अब वही जवान तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा। यह सोचकर गांव के लोग भी भावुक हो उठे हैं। जवान की असमय मौत ने एक बार फिर जिंदगी की अनिश्चितता और सैनिक परिवारों के दर्द को सामने ला दिया है।