सोलन। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसौली के जंगलों में लगी भीषण आग ने लगातार दूसरे दिन भी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 40 घंटे बीत जाने के बावजूद आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।

40 घंटे से जल रहा हिमाचल का जंगल 

आग अब तक लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में फैल चुकी है और बड़े हिस्से में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। हालांकि मॉल रोड के आसपास के हिस्सों में स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में बताई जा रही है। मगर नाहरी क्षेत्र के जंगलों में बुधवार को भी कई स्थानों पर आग भड़कती रही।

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आर्मी-वायुसेना का ऑपरेशन जारी

दुर्गम पहाड़ी इलाकों और तेज हवाओं के कारण राहत एवं बचाव कार्य में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। आग बुझाने के लिए सेना और वायुसेना को भी मोर्चे पर उतरना पड़ा है। सेना का हेलीकॉप्टर मंगलवार शाम से लगातार ऑपरेशन चला रहा है।

50 राउंड पानी बरसा चुके हेलीकॉप्टर

हेलीकॉप्टर अब तक सुखना लेक से 50 से अधिक बार पानी भरकर प्रभावित क्षेत्रों में गिरा चुका है। इसके अलावा सेना के जवान, दमकल विभाग की टीमें और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी लगातार जंगलों में आग बुझाने में जुटे हुए हैं।

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सैकड़ों बीघा जंगल को नुकसान

जानकारी के अनुसार आग मंगलवार दोपहर बाद कसौली के मनोण गांव के जंगलों में शुरू हुई थी। देखते ही देखते आग ने सैकड़ों बीघा जंगल को अपनी चपेट में ले लिया। आग के कारण करोड़ों रुपये की वन संपदा जलकर राख हो गई है। कई स्थानों पर पेड़, झाड़ियां और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुआ है।

और ज्यादा हो सकता था नुकसान

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देर रात तक राहत अभियान जारी रहा। सेना के जवानों और कैंटोनमेंट बोर्ड के फायरमैन ने पूरी रात कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में काम करते हुए आग को रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो नुकसान और भी अधिक हो सकता था।

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सेना ने टाल दिया बड़ा खतरा

बताया जा रहा है कि आग मंगलवार को कसौली क्लब और सीआरआई क्षेत्र के बेहद करीब पहुंच गई थी। ऐसे में सेना की त्वरित कार्रवाई ने बड़े खतरे को टाल दिया। स्थानीय लोगों ने स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर संदीप मदान सहित सेना और वायुसेना की टीमों के प्रयासों की सराहना की है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने समय रहते मोर्चा संभालकर कसौली को बड़े नुकसान से बचाया।

पूरे इलाके में धुएं के गुबार

जंगलों में उठ रही आग की लपटों के कारण पूरे कसौली में धुएं का घना गुबार छाया हुआ है। हालात ऐसे हैं कि धुएं के कारण लोगों को सांस तक लेने में दिक्कत हो रही है और आंखों में जलन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से जंगलों की ओर अनावश्यक न जाने और आग से जुड़ी किसी भी लापरवाही से बचने की अपील की है।

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कैसे लगी जंगल में आग?

फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि चीड़ के सूखे पत्तों और गर्म मौसम के कारण आग तेजी से फैली। कसौली और आसपास के क्षेत्रों में हर साल गर्मियों के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं सामने आती हैं, क्योंकि चीड़ के जंगल आग के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

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