कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की चर्चित ग्राम पंचायत धवाला में प्रधान पद के चुनाव ने इस बार बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। पंचायत चुनाव के नतीजों में चौधरी रजनीकांत (जोगा) ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को भारी मतों के अंतर से हराकर रिकॉर्ड जीत दर्ज की है। उनकी इस जीत ने न केवल पंचायत बल्कि पूरे देहरा क्षेत्र में चर्चा छेड़ दी है।

चौधरी रजनीकांत ने 610 वोटों से जीता चुनाव

चुनाव परिणामों के अनुसार चौधरी रजनीकांत को कुल 825 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी हेमराज को 215 मत प्राप्त हुए। इस तरह रजनीकांत ने करीब 610 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर प्रधान पद पर कब्जा जमाया।

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पांच साल के काम पर लगी मुहर

रजनीकांत इससे पहले ग्राम पंचायत धवाला में उपप्रधान के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने इसका श्रेय पंचायत की जनता को दिया। उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान किए गए कार्यों और लोगों के विश्वास का ही परिणाम है कि जनता ने उन्हें प्रधान पद की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि पंचायत के विकास, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

जीत के बाद जश्न का माहौल

परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। पंचायत क्षेत्र में विजय जुलूस निकाला गया और समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाया। घर पहुंचने पर पूर्व मंत्री रमेश धवाला ने अपने भतीजे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आशीर्वाद दिया।

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धवाला परिवार की राजनीतिक विरासत फिर चर्चा में

रजनीकांत की जीत के बाद एक बार फिर पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश धवाला का राजनीतिक प्रभाव चर्चा में आ गया है। ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे रमेश धवाला हिमाचल की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं। वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने निर्दलीय जीत हासिल की थी और उनके समर्थन से प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन का रास्ता खुला था।

जब करना पड़ा था हार का सामना

हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था और तब से वे सक्रिय राजनीति में पहले जैसी भूमिका में नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में धवाला पंचायत में उनके भतीजे की यह बड़ी जीत समर्थकों के लिए खास मायने रखती है।

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हार की हो रही चर्चा

आपको बता दें कि CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर इस क्षेत्र से विधायक हैं। धवाला परिवार की जीत के बाद सियासी गलियारों में इस हार की चर्चा तेज हो चुकी है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

धवाला पंचायत का यह परिणाम अब स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े अंतर से मिली जीत पंचायत स्तर पर मजबूत जनसमर्थन का संकेत देती है और आने वाले समय में इसका असर क्षेत्रीय राजनीति में भी देखने को मिल सकता है।

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