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May 29, 2026
हिमाचल में रिश्तों की सियासत : पंचायत चुनावों में सास ने बहू को 4 वोटों से हराया, ननद ने भाभी को दी मात
कई जगह जीत और हार का अंतर बेहद कम रहा
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मंडी। पंचायत चुनावों में आमतौर पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच मुकाबला देखने को मिलता है, लेकिन इस बार हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज क्षेत्र की केओली पंचायत में चुनावी जंग घर की चौखट से निकलकर मतदान केंद्र तक पहुंच गई।
यहां सास-बहू और ननद-भाभी के बीच हुए मुकाबलों ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। चुनाव परिणाम सामने आते ही यह पंचायत हिमाचल की सबसे चर्चित पंचायतों में शामिल हो गई।
पूर्व CM व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह विधानसभा क्षेत्र सराज की केओली पंचायत में इस बार चुनाव केवल वोटों की लड़ाई नहीं रहे, बल्कि रिश्तों और राजनीति के अनोखे संगम के रूप में सामने आए। दूसरे चरण के मतदान और मतगणना के बाद जब नतीजे घोषित हुए तो कई वार्डों में परिवार के सदस्य ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते नजर आए।
केओली पंचायत के वार्ड नंबर-2 (केओली-1) में सबसे चर्चित मुकाबला ननद और भाभी के बीच था। इस सीट पर वीना देवी और उनकी भाभी खीरामणी आमने-सामने थीं। पूरे दिन इस मुकाबले को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रही। मतगणना पूरी होने के बाद वीना देवी ने 58 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर भाभी को पराजित कर दिया।
वार्ड नंबर-4 (केओली-3) में सास और बहू के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। यहां रीना ठाकुर और उनकी बहू लता चुनाव मैदान में थीं। मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अंत में रीना ठाकुर ने मात्र 4 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर ली। यह परिणाम पूरे पंचायत क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
केओली पंचायत के वार्ड नंबर-5 (केओली-4) में भी सास और बहू के बीच चुनावी मुकाबला हुआ। यहां सवित्रा देवी ने अपनी बहू वनिता ठाकुर को 23 वोटों से पराजित किया। इस परिणाम ने यह साफ कर दिया कि पंचायत चुनाव में रिश्तों से ज्यादा मतदाताओं का फैसला मायने रखता है।
मतदान और मतगणना के दौरान पूरे सराज क्षेत्र की नजर इन वार्डों पर टिकी रही। ग्रामीणों के बीच दिनभर यही चर्चा होती रही कि आखिर घर के भीतर की यह चुनावी लड़ाई किसके पक्ष में जाएगी। कई जगह जीत और हार का अंतर बेहद कम रहा, जिससे चुनावी रोमांच और बढ़ गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सराज के इन परिणामों ने गांव की बदलती राजनीति की तस्वीर पेश की है। अब पंचायत चुनावों में केवल रिश्तों के आधार पर वोट नहीं पड़ते, बल्कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, जनसंपर्क और स्वीकार्यता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।