शिमला। हिमाचल प्रदेश में बीते कल कई जगहों पर चिलचिलाती धूप खिली रही। जिस कारण तापमान में उछाल दर्ज किया गया। वहीं, आज सुबह से भी धर्मशाला, कांगड़ा, ऊना समेत कई अन्य जगहों पर धूप निकली हुई है। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि अब सूबे मानसून कमोजर पड़ गया है, लेकिन ऐसा नहीं है।
भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
दरअसल, मौसम विभाग ने प्रदेश के दो जिलों- कांगड़ा और सिरमौर में भारी बारिश की चेतावनी के बीच ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, इन इलाकों में दिन भर में एक-दो बार तेज बारिश की बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे निचले क्षेत्रों में जलभराव, सड़कों पर कीचड़ और छोटी नदियों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है।
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नदी-नालों से रहें दूर
प्रशासन ने इन दोनों जिलों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को पहाड़ी ढलानों, नदी किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने जरूरी सेवाओं को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
सड़क पर गिरा भारी-भरकम पत्थर
बारिश का सीधा असर राज्य के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी देखने को मिल रहा है। बीती रात मंडी जिला में हुई भारी बारिश के कारण चार मील के पास चंडीगढ़-मनाली फोरलेन पर भारी भरकम पत्थर पहाड़ से गिरकर सड़क पर आ गए। इसके चलते हाईवे को एक बार फिर से यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।
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लोगों को करना पड़ा दिक्कत का सामना
गौरतलब है कि इसी स्थान पर एक दिन पहले भी मलबा गिरा था और सड़क को 26 घंटे की मशक्कत के बाद बहाल किया गया था। अब फिर से सड़क के बंद होने से कुल्लू-मनाली आने-जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अन्य जिलों में भी अलर्ट
मौसम विभाग ने मंडी, शिमला और सोलन जिलों के लिए आज यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, अगले दिन यानी 15 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में भी यलो अलर्ट लागू रहेगा। 16 जुलाई को किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर बाकी सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी है। 17 जुलाई को फिर से चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और सिरमौर में तेज बारिश की संभावना जताई गई है।
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अब तक 98 लोगों की मौत
इस बार का मानसून सीजन हिमाचल के लिए बेहद जानलेवा साबित हो रहा है। अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में कुल 98 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से-
- 24 की जान लैंडस्लाइड बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं से गई है।
- 9 लोग पानी में डूब गए
- 4 लोग करंट की चपेट में आए
- 4 को सांप ने काट लिया
- 1 की जान आग लगने से गई।
- 10 लोग पहाड़ियों से गिरकर मारे गए
- अन्य 5 लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से हुई है।
- 41 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है।
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34 लोग अभी भी लापता
राज्य भर से अब तक 34 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। अधिकतर मामले लैंडस्लाइड और नदियों में बह जाने से जुड़े हैं। वहीं, राज्य में लगातार हो रही बारिश से सड़क नेटवर्क भी पूरी तरह चरमरा गया है। वर्तमान में 191 सड़कें बारिश और मलबे की वजह से बंद पड़ी हैं, जिनमें से कई मार्ग पिछले दस दिनों से अवरुद्ध हैं।
जनजीवन अस्त-व्यस्त, प्रशासन अलर्ट मोड पर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस मानसून सीजन में अब तक लगभग 770 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हो चुका है, जिसमें निजी घरों, पुलों, सड़कों, सरकारी भवनों और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य के सभी संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। NDRF और SDRF की टीमें संभावित संकट वाले इलाकों में तैनात की जा रही हैं। स्कूलों में छुट्टियों की घोषणा भी की जा सकती है यदि स्थिति और बिगड़ती है।
