#विविध
March 12, 2026
सुक्खू सरकार को आयोग की दो टूक: 21 निकायों में चुनाव टालने से इनकार, रोस्टर लागू करने के निर्देश
सुक्खू सरकार ने आयोग से की थी 21 निकायों के चुनाव टालने की मांग
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। राज्य की सुक्खू सरकार जहां कुछ नए बनाए गए शहरी निकायों में फिलहाल चुनाव करवाने के पक्ष में नहीं दिख रही, वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ शब्दों में कह दिया है कि प्रदेश के सभी नगर निकायों में चुनाव एक साथ ही कराए जाएंगे। आयोग ने सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें 21 नए स्थानीय शहरी निकायों में फिलहाल चुनाव टालने की बात कही गई थी।
इस बीच शहरी विकास विभाग ने प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और उपायुक्तों को पत्र जारी कर 53 स्थानीय शहरी निकायों में आरक्षण रोस्टर जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इसे ‘मोस्ट अर्जेंट-टाइम बाउंड’ मामला बताते हुए अधिकारियों से जल्द प्रक्रिया पूरी करने को कहा हैए ताकि चुनाव की तैयारियां आगे बढ़ाई जा सकें।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार चाहती है कि हाल ही में बनाए गए 21 नए शहरी निकायों में अभी चुनाव न कराए जाएं। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति भी मांगी गई थी। लेकिन आयोग ने सरकार की इस मांग को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में चुनाव एक साथ ही कराए जाएंगे।
आयोग का तर्क है कि अलग.अलग चरणों में चुनाव कराने से बार.बार आचार संहिता लागू करनी पड़ती हैए जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं और प्रशासनिक खर्च भी बढ़ता है।
सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच इस मतभेद के चलते अब 21 स्थानीय शहरी निकायों में चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और आयोग के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसलए अदालतों ने भी निकाय चुनावों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हुए हैं। हिमाचल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार 31 मार्च तक सभी शहरी निकायों में आरक्षण रोस्टर लागू किया जाना है और 31 मई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी है। ऐसे में सरकार की मंशा और निर्वाचन आयोग के रुख के बीच तालमेल कैसे बैठता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश में कुल 75 शहरी निकाय हैं, जिनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं। इनमें से शिमला नगर निगम को छोड़कर अधिकांश निकायों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। 47 से अधिक निकायों में कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार ने फिलहाल प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं। नियमों के अनुसार इन निकायों में चुनाव पहले ही कराए जाने चाहिए थे, लेकिन प्राकृतिक आपदा और अन्य कारणों का हवाला देते हुए चुनाव टाले जाते रहे।
अब अदालतों के निर्देशों और निर्वाचन आयोग के सख्त रुख के बाद हिमाचल में निकाय चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और आयोग के बीच चल रही इस खींचतान का अंत किस तरह होता है और प्रदेश में शहरी निकायों के चुनाव कब और कैसे कराए जाते हैं।