#विविध
March 13, 2026
समय पर नहीं पहुंची नई HRTC बसें : कंपनी को लेट-लतीफी पड़ी महंगी, 42 करोड़ का लगेगा फटका
कंपनी को दिया जाएगा अपना पक्ष रखने का अवसर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की योजना के बीच इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति में देरी अब कंपनी पर भारी पड़ सकती है। HRTC ने तय समय पर बसों की डिलीवरी न करने पर संबंधित कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, निगम ने 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए करीब 424.01 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। टेंडर की शर्तों के मुताबिक अगर कंपनी समय सीमा में बसें उपलब्ध नहीं कराती है तो कुल लागत का लगभग 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस हिसाब से कंपनी को करीब 42 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है। हाल ही में इस मुद्दे पर निगम के निदेशक मंडल की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने की। बैठक में निर्णय लिया गया कि टेंडर में निर्धारित नियमों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कंपनी को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
कंपनी की ओर से देरी के पीछे तकनीकी कारण बताए गए हैं। उनका कहना है कि इन इलेक्ट्रिक बसों की बैटरी में लगने वाली एक विशेष चिप चीन से आयात की जाती है और उसके आने में देरी होने से बसों का निर्माण प्रभावित हुआ है। हालांकि निगम प्रबंधन का कहना है कि कंपनी को पहले ही बसों की आपूर्ति के लिए 11 महीने का पर्याप्त समय दिया गया था, इसलिए अनुबंध की शर्तों का पालन करना जरूरी है।
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रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड को 297 ई-बसों की आपूर्ति का आदेश दिया गया था। अनुबंध के तहत कंपनी को 9 जनवरी तक कम से कम 149 बसें, यानी कुल ऑर्डर का आधा हिस्सा उपलब्ध कराना था, लेकिन कंपनी इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकी।
इस बीच एचआरटीसी के सामने बसों की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। निगम ने हाल ही में अपने बेड़े से 100 से अधिक पुरानी बसों को हटा दिया है और करीब 150 बसें ऐसी हैं जो 10 से 12 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं तथा उनका रखरखाव खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। नई बसें समय पर न मिलने के कारण निगम को फिलहाल इन्हीं पुरानी बसों को चलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रबंधन के अनुसार आने वाली नई इलेक्ट्रिक बसें आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। ये 30 सीटों वाली बसें होंगी जिन्हें लगभग आधे घंटे में चार्ज किया जा सकेगा और एक बार चार्ज करने पर यह करीब 180 किलोमीटर तक चलेंगी। एक बस की कीमत लगभग 1.71 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है और कंपनी 12 साल तक इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगी।
फिलहाल कंपनी की ओर से एक बस ट्रायल के लिए भेजी गई है, जिसका परीक्षण शिमला और सोलन सहित प्रदेश के कई अन्य स्थानों पर किया गया है। ट्रायल के दौरान कुछ तकनीकी बदलावों के सुझाव भी कंपनी को दिए गए हैं।