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March 13, 2026
हिमाचल में गजब का मामला: तेंदुए को मा.र गिराने वाला युवक पहले किया सम्मानित, अब दर्ज की FIR
अपनी जान बचाने को युवक ने मार गिराया तेंदुआ, 24 घंटे में बदला विभाग
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सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को हैरानी में डाल दिया है। यहां एक 18 वर्षीय आईटीआई छात्र परवेश शर्मा ने अपनी जान बचाने के लिए तेंदुए से भिड़कर उसे मार गिराया। पहले उसकी बहादुरी की सराहना करते हुए वन विभाग ने उसे सम्मानित किया और आर्थिक सहायता भी दीए लेकिन कुछ ही समय बाद उसी घटना को लेकर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। इस घटनाक्रम ने लोगों को हैरत में डाल दिया है और गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, घटना उस वक्त की है जब सरली गांव का परवेश सुबह के समय घर से दूध लेने निकला था। अचानक झाड़ियों में घात लगाकर बैठी मादा तेंदुए ने उस पर पीछे से जानलेवा हमला कर दिया। तेंदुए के नुकीले दांत और पंजे परवेश के चेहरे और गर्दन को छलनी कर रहे थे। मौत सामने खड़ी थी, लेकिन परवेश ने घुटने टेकने के बजाय लड़ने का फैसला किया।
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लगभग 12 मिनट तक चले इस रोंगटे खड़े कर देने वाले संघर्ष में परवेश ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उसने नंगे हाथों से तेंदुए के जबड़े पकड़ लिए और पास पड़े पत्थर व लाठी से वार कर अपनी जान बचाई। अंत में तेंदुआ ढेर हो गया और परवेश लहूलुहान हालत में मौत को हराकर बाहर निकला।
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उस समय पहले तो वन विभाग ने परवेश के साहस को सलाम किया और उसे हीरो करार देते हुए 5,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान की। लेकिन जैसे ही 24 घंटे बीते] विभाग के तेवर बदल गए। जिस विभाग ने आत्मरक्षा की बात कहकर इनाम दिया था] उसी विभाग ने अब वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत परवेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे थाने तलब कर लिया है।
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परवेश के परिवार ने इस कार्रवाई पर हैरानी जताई है। युवक के पिता बालक राम और गांव वालों का कहना है कि जब विभाग ने पहले ही यह मान लिया था कि बेटे ने अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष किया, तो फिर उसके खिलाफ मामला दर्ज करना समझ से परे है। उनका कहना है कि बेटे ने किसी शौक में नहीं बल्कि अपनी जान बचाने के लिए यह कदम उठाया था।
वन अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। नियमों के अनुसार किसी भी संरक्षित वन्यजीव की मृत्यु होने पर मामला दर्ज करना और आगे की जांच करना अनिवार्य होता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आत्मरक्षा की स्थिति में किया गया कार्य अपराध की श्रेणी में नहीं माना जाता।
उधर, इस घटना के बाद इलाके में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से गांव और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ गई हैं। कई बार पालतू जानवरों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। लोगों ने वन विभाग से इलाके में पिंजरे लगाने और गश्त बढ़ाने की मांग की है।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते मानव और वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है, जहां एक ओर लोग अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानून और नियमों की प्रक्रिया भी अपना रास्ता तय करती नजर आती है।