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March 15, 2026

सुक्खू सरकार के CBSE स्कूलों में बढ़ने लगे दाखिले, निजी स्कूल डालने लगे अड़ंगा- जानें

सर्टिफिकेट जारी करने में कर रहे टालमटोल

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Private School Notice

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी सीबीएसई स्कूलों में दाखिले बढ़ाने की पहल के बीच अब निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर भी सख्ती दिखाई जा रही है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने उन निजी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है जो विद्यार्थियों को समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रहे हैं। ऐसे संस्थानों को जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्टिफिकेट जारी करने में कर रहे टालमटोल

शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिलों के उपनिदेशकों- माध्यमिक, प्रारंभिक और गुणवत्ता को निर्देश देते हुए कहा है कि निजी स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाए। यदि किसी स्कूल की ओर से एसएलसी जारी करने में अनावश्यक देरी की जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

 

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अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निजी स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखें। निदेशालय के अनुसार कई जिलों से शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ निजी स्कूल विद्यार्थियों या अभिभावकों के आवेदन देने के बावजूद स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी करने में टालमटोल कर रहे हैं। इससे छात्रों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एनओसी तक रद्द करने की हो सकती है कार्रवाई

विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए साफ किया है कि यह व्यवस्था बच्चों के शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रत्येक बच्चे को अपनी पसंद के स्कूल में पढ़ने का अधिकार है। ऐसे में जब कोई विद्यार्थी स्कूल बदलना चाहता है, तो संबंधित स्कूल का दायित्व बनता है कि वह समय पर एसएलसी जारी करे, ताकि छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो।

 

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इस संबंध में स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट किया है कि यदि निजी संस्थान इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित संस्थान की एनओसी रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना जरूरी

विभाग का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रभावित न हो।

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