शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुक्खू मंत्रिमंडल ने राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के चौथे चरण को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रदेशभर में करीब एक हजार निजी बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
योजना में शामिल हैं 18 से 32 सीटों वाली बसें
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत पात्र आवेदकों को बस खरीदने पर आकर्षक सब्सिडी दी जाएगी। ई-बस खरीदने वाले लाभार्थियों को वाहन लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जबकि डीजल बस खरीदने पर 30 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
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यदि कोई युवा एक करोड़ रुपये की लागत वाली इलेक्ट्रिक बस खरीदता है तो उसे सरकार की ओर से 50 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकेगी। योजना में 18 से 32 सीटों वाली बसों को शामिल किया गया है, जिन्हें विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में संचालित किया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिल सकें।
बस संचालकों को आर्थिक राहत के लिए कई करों में छूट
सरकार ने सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए इन बसों में छात्रों के लिए मुफ्त यात्रा और महिलाओं के लिए आधे किराये की व्यवस्था भी प्रस्तावित की है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी यात्रा लागत कम होगी।
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योजना के तहत बस संचालकों को आर्थिक राहत देने के लिए कई करों से भी छूट दी जाएगी। निजी बसों पर विशेष सड़क कर, विशेष पथकर और गुड्स टैक्स लागू नहीं होगा। इसके अलावा यदि बस संचालन के दौरान घाटा होता है तो सरकार उसकी भरपाई में भी सहायता करेगी।
ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
निर्धारित प्रावधानों के अनुसार डीजल बस संचालकों को प्रति माह 50 हजार रुपये तक और ई-बस ऑपरेटरों को 75 हजार रुपये तक की क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे युवाओं को कारोबार शुरू करने में जोखिम कम होगा और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा, बल्कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधाएं भी बेहतर होंगी। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।
