मंडी। हिमाचल प्रदेश में गांव की राजनीति को आपसी सहमति, भाईचारे और सौहार्द की दिशा में बढ़ावा देने के लिए सुक्खू सरकार ने बड़ा प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। प्रदेश में निर्विरोध चुनी गई पंचायतों को सरकार की ओर से 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश की 136 पंचायतों के लिए 34 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया गया है।

 

सरकार की इस पहल का उद्देश्य पंचायत चुनाव में आपसी सहमति और भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित करना है, ताकि गांवों में चुनावी प्रतिस्पर्धा के बजाय मिल-जुलकर पंचायत प्रतिनिधियों का चयन करने की परंपरा को बढ़ावा मिले। अब स्वीकृत राशि संबंधित पंचायतों के खातों में जारी की जाएगी।

कितनी पंचायतों को मिलेंगे 34 करोड़ रुपए

हिमाचल में जिन पंचायतों का चुनाव आपसी सहमति से निर्विरोध हुआ है, उन्हें सरकार की ओर से 25 लाख रुपये प्रति पंचायत दिए जा रहे हैं। प्रदेश की 136 पंचायतों के लिए कुल 34 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि पंचायतों को एकमुश्त उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके बाद संबंधित पंचायतें अपने क्षेत्र की जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर विकास कार्यों पर इस धनराशि को खर्च कर सकेंगी। सरकार की इस व्यवस्था से निर्विरोध पंचायतों को सीधे विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिलने की उम्मीद है।

 

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मंडी की पांच पंचायतों के खाते में आएंगे 1.25 करोड़

इस योजना का लाभ मंडी जिले की पांच पंचायतों को भी मिलने जा रहा है। जिले की इन पांच पंचायतों का चुनाव आपसी सहमति से निर्विरोध हुआ था। इन सभी पंचायतों को 25-25 लाख रुपये मिलेंगे। इस हिसाब से मंडी जिले की पांच पंचायतों के लिए कुल 1 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जिसे आगामी दिनों में पंचायतों के खातों में जारी किया जाएगा।

गोहर से लेकर चौंतड़ा तक इन पंचायतों को मिलेगा लाभ

मंडी जिले की जिन पांच पंचायतों को सरकार की प्रोत्साहन राशि मिलेगी, उनमें अलग-अलग विकासखंडों की पंचायतें शामिल हैं। गोहर ब्लॉक की गुडार और अनाह पंचायत, द्रंग ब्लॉक की चेली (चैहड़गलू) पंचायत, चौंतड़ा ब्लॉक की गोलवां पंचायत और चुराग ब्लॉक की कांढ़ा पंचायत को 25-25 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इन पंचायतों के लिए राशि स्वीकृत होने के बाद अब इसे जल्द पंचायतों के खातों में ट्रांसफर किया जाएगा।

 

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विधायक प्रकाश राणा की गृह पंचायत भी सूची में

मंडी जिले की गोलवां पंचायत इस योजना के तहत इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि यह जोगेंद्रनगर के विधायक प्रकाश राणा की गृह पंचायत है। पंचायत के निर्विरोध चुने जाने के बाद अब सरकार की ओर से घोषित प्रोत्साहन राशि भी पंचायत को मिलने जा रही है। 25 लाख रुपये की यह राशि पंचायत के लिए स्थानीय विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल की जाएगी।

गांव की सहमति को सरकार का आर्थिक प्रोत्साहन

सरकार की इस योजना को सिर्फ आर्थिक सहायता के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसका एक प्रमुख उद्देश्य गांवों में आपसी भाईचारे और सहमति की राजनीति को बढ़ावा देना भी है। पंचायत चुनावों में कई बार उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के कारण गांवों में मतभेद और आपसी खींचतान की स्थिति बन जाती है।

 

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ऐसे में निर्विरोध पंचायतों को प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था के जरिए सरकार लोगों को आपसी सहमति से पंचायत चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। योजना के तहत मिलने वाली राशि का इस्तेमाल गांव के विकास कार्यों में किया जाना है, जिससे पंचायतों में सड़क, रास्ते, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य स्थानीय जरूरतों से जुड़े कामों को गति दी जा सकती है।

मनमाने तरीके से खर्च नहीं होगी राशि

पंचायतों को मिलने वाली 25 लाख रुपये की राशि को निर्धारित प्रक्रिया के तहत विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। इसके लिए पंचायतों को यह तय करना होगा कि उपलब्ध बजट को किन कार्यों पर खर्च किया जाना है। यानी राशि पंचायत के खाते में पहुंचने के बाद उसके उपयोग की योजना तैयार की जाएगी और किस विकास कार्य पर कितना पैसा खर्च किया गया, इसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इससे प्रोत्साहन राशि को गांव की वास्तविक जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल करने पर जोर रहेगा।

 

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अगले सप्ताह तक मंडी की पंचायतों को मिलने की उम्मीद

मंडी जिला पंचायत अधिकारी अंचित डोगरा के अनुसार जिले की पांच निर्विरोध चुनी गई पंचायतों के लिए 25-25 लाख रुपये की राशि सरकार की ओर से आ चुकी है। आगामी दिनों में यह राशि संबंधित पंचायतों को जारी कर दी जाएगी। सरकार की ओर से बजट जारी होने के बाद अब पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।

 

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सरकार की इस पहल से एक ओर निर्विरोध पंचायतों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, तो दूसरी ओर ग्रामीण स्तर पर आपसी सहमति, भाईचारे और सामूहिक निर्णय की परंपरा को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया गया है। अब इन पंचायतों के सामने चुनौती होगी कि वे मिली राशि को गांव की प्राथमिक जरूरतों के अनुसार पारदर्शी तरीके से विकास कार्यों में इस्तेमाल करें।

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