शिमला। छोटे से पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले ही एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज का सामना कर रहे प्रदेश में अब सुक्खू सरकार एक बार फिर 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही राज्य सरकार ने दो अलग-अलग किश्तों में यह ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि यह राशि विकास कार्यों में खर्च होगी, जबकि विपक्ष इसे प्रदेश को कर्ज के बोझ में और धकेलने वाला कदम बता रहा है।
आज कर्मचारियों-पेंशनरों के खाते में आएगा पैसा
इस बीच आज शनिवार को प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत की खबर है। आज उनके खातों में वेतन और पेंशन की राशि जमा होगी। हर महीने की पहली तारीख को वेतन और पेंशन मिलने का इंतजार रहता है। हालांकि, यह भुगतान सरकार के नए 700 करोड़ रुपये के कर्ज से नहीं किया जा रहा है। इसके लिए पहले से तय वित्तीय व्यवस्था के तहत राशि जारी की जा रही है।
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700 करोड़ का नया कर्ज लेने की तैयारी
राज्य सरकार ने 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह राशि 400 करोड़ और 300 करोड़ रुपये की दो किश्तों में जुटाई जाएगी। दोनों ऋणों की नीलामी 4 अगस्त को होगी, जबकि 5 अगस्त को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में पहुंचेगी।
विकास कार्यों में खर्च होगा कर्ज का पैसा
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पहले इस्तेमाल की जा चुकी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) के आधार पर ही यह नया ऋण लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि कर्ज से मिलने वाली इस राशि का इस्तेमाल अलग-अलग विकास परियोजनाओं और विकास कार्यों में किया जाएगा।
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18 से 23 साल तक चुकाना होगा कर्ज
सरकार द्वारा लिए जा रहे 400 करोड़ रुपये के ऋण की अवधि 18 वर्ष निर्धारित की गई है। इस पर करीब 7.78 प्रतिशत ब्याज देना होगा। वहीं 300 करोड़ रुपये का दूसरा ऋण 23 वर्षों के लिए लिया जाएगा और इस पर करीब 7.70 प्रतिशत ब्याज दर लागू होगी। यानी आने वाले कई वर्षों तक प्रदेश सरकार को इस कर्ज की रकम के साथ ब्याज भी चुकाना होगा।
पहले ही कर्ज के भारी बोझ तले दबा है हिमाचल
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही दबाव में है। राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये का स्तर पार कर चुका है। सीमित संसाधनों वाले इस पहाड़ी राज्य की आय कम है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकार को बार-बार बाजार से ऋण लेना पड़ रहा है। इससे पहले जून महीने में भी राज्य सरकार ने 700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
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राजस्व घाटा भी बनी बड़ी चुनौती
केंद्र से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट यानी आरडीजी बंद होने के बाद हिमाचल की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ गई हैं। सीमित राजस्व और बढ़ते खर्च के बीच सरकार के सामने विकास कार्यों को जारी रखना आसान नहीं है। यही वजह है कि सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए बार-बार कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है।
नए कर्ज पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
नए कर्ज को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार विकास की बजाय कर्ज के सहारे प्रदेश चला रही है और हिमाचल को कर्ज के बोझ तले दबा रही है।
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वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और भारी कर्ज की बड़ी वजह पिछली भाजपा सरकार की वित्तीय नीतियां हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़कर गई थी, जिसका असर आज भी राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है।
700 करोड़ का कर्ज 5 अगस्त को आएगा
आज 1 अगस्त को कर्मचारियों और पेंशनरों के खातों में वेतन और पेंशन आएगी, जबकि सरकार द्वारा लिया जा रहा 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज 5 अगस्त को राज्य के खजाने में पहुंचेगा। इस कर्ज को सरकार विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की बात कह रही है, लेकिन बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है।
