शिमला। हिमाचल प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव से पहले एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने नई ग्राम पंचायतों के गठन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। आयोग के इस फैसले को सुक्खू सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में पंचायती राज विभाग की ओर से कई नई पंचायतों के गठन की अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।
निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को सख्त पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के बीच लगातार नई पंचायतों का गठन करने से कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की प्रक्रिया जारी रही तो पंचायत चुनाव समय पर करवाने में बाधा आ सकती है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन भी हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने तय की चुनाव की समय सीमा
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने विभाग को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया है। अदालत ने 13 फरवरी 2026 को निर्देश जारी करते हुए कहा था कि राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, शहरी विकास विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सभी लंबित प्रक्रियाओं को 31 मार्च तक पूरा करें। इसके बाद 31 मई से पहले पंचायत चुनाव करवाना अनिवार्य होगा। इसी के तहत पंचायतों के वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी करने और अंतिम आरक्षण आदेश 31 मार्च तक जारी करने का लक्ष्य रखा गया था।
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नई पंचायतों की अधिसूचना से बढ़ी परेशानी
इसी बीच पंचायती राज विभाग ने 26 फरवरी को शिमला, सोलन और हमीरपुर जिलों में नई ग्राम पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। हैरानी की बात यह रही कि इन पंचायतों को जिला परिषद वार्डों के प्रारंभिक परिसीमन में शामिल ही नहीं किया गया था। इसके दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को विभाग ने करीब 80 और नई ग्राम पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। निर्वाचन आयोग का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति इतनी बड़ी संख्या में पंचायतों का गठन चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
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परिसीमन प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
आयोग के अनुसार नई पंचायतों के गठन, पुनर्गठन या विभाजन से पहले से जारी वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा। इसका प्रभाव सिर्फ ग्राम पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्ड परिसीमन में भी उलझन पैदा हो सकती है।
पहले सीमाएं हो चुकी हैं फ्रीज
गौरतलब है कि 17 नवंबर 2025 को आदर्श आचार संहिता की धारा 12.1 के तहत पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओं को फ्रीज कर दिया गया था। उस समय पंचायती राज विभाग ने 31 नई पंचायतों के गठन के लिए निर्वाचन आयोग से विशेष छूट मांगी थी। लेकिन अब आयोग का कहना है कि हाल ही में अधिसूचित करीब 80 ग्राम पंचायतों का गठन बिना पूर्व अनुमति के कर दिया गया, जिससे चुनावी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
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आयोग ने लगाई तत्काल रोक
इन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फिलहाल नई ग्राम पंचायतों के गठन या पुनर्गठन की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव से पहले आया यह फैसला प्रदेश सरकार के लिए बड़ा झटका है। अब सरकार और पंचायती राज विभाग को आयोग के निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय करनी होगी, ताकि तय समय सीमा के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न करवाए जा सकें।
