कुल्लू। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले के पर्यटन क्षेत्र कसोल में जंगलों के बीच आयोजित होने वाली रेव पार्टियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

रेव पार्टियों से नाराज हाईकोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि प्राकृतिक और संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह के आयोजनों को किसी भी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। इसी क्रम में न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कुल्लू के पुलिस अधीक्षक और संबंधित SDM के तबादले के आदेश जारी किए हैं।

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SP-SDM का तबादला

अदालत का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रमों की तैयारियां और प्रचार होने के बावजूद प्रशासन समय रहते प्रभावी कार्रवाई करने में विफल क्यों रहा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बीसी नेगी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जंगलों और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में आयोजित होने वाली रेव पार्टियां केवल कानून-व्यवस्था के लिए ही चुनौती नहीं हैं- बल्कि इनसे पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति और सार्वजनिक शांति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सोशल मीडिया प्रचार से खुला मामला

मामले की शुरुआत तब हुई जब कसोल क्षेत्र में जून माह के दौरान प्रस्तावित एक बड़े आयोजन को लेकर विभिन्न माध्यमों में खबरें सामने आईं। जानकारी के अनुसार कार्यक्रम का प्रचार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक स्तर पर किया जा रहा था।

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संगीत, डांस और पार्टी

आयोजकों द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा था। प्रचार सामग्री में संगीत, डांस और कई दिनों तक चलने वाले विशेष कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया था।

16 हजार तक बिकी टिकट

बताया गया कि आयोजन के लिए टिकटों की कीमत लगभग 10 हजार से 16 हजार रुपये रखी गई थी और बड़ी संख्या में लोगों के पंजीकरण का दावा भी किया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और प्रचार सामग्री ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया, जिसके बाद यह विषय न्यायालय के संज्ञान में आया।

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मौके का निरीक्षण करवाया गया

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कुल्लू जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव को मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से क्षेत्र का दौरा किया और स्थिति का आकलन किया।

 

इसके अतिरिक्त अदालत ने कुल्लू के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने को भी कहा था। न्यायालय यह जानना चाहता था कि मीडिया में प्रकाशित जानकारी और वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है तथा प्रशासन ने समय रहते क्या कदम उठाए।

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जंगलों में आयोजन पर अदालत की चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वन क्षेत्रों और प्राकृतिक स्थलों को व्यावसायिक आयोजनों का केंद्र बनाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। न्यायालय का मानना है कि ऐसे आयोजनों के कारण शोर प्रदूषण, कूड़ा-कचरा, वन्यजीवों पर प्रभाव और स्थानीय निवासियों को होने वाली परेशानियों जैसे कई गंभीर मुद्दे सामने आते हैं।

जंगलों को हो रहा नुकसान

खंडपीठ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए जाना जाता है। ऐसे में जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित आयोजनों को अनुमति देना भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।

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आयोजकों पर कार्रवाई के निर्देश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए इस प्रकार के आयोजन किए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने प्रशासन को यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में ऐसे मामलों की निगरानी और अधिक प्रभावी ढंग से की जाए ताकि किसी भी अवैध आयोजन को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सके।

पर्यटन और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी

कसोल और पार्वती घाटी देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिने जाते हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अवैध पार्टियों, नशे और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर भी समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति और कानून व्यवस्था का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। यदि नियमों की अनदेखी कर बड़े आयोजन किए जाते हैं तो इससे क्षेत्र की छवि और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

मामले में अब अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 6 अगस्त निर्धारित की है। तब तक संबंधित विभागों और अधिकारियों से की गई कार्रवाई का ब्यौरा भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रदेशभर में इस मामले को लेकर चर्चा है और माना जा रहा है कि अदालत के इस सख्त रुख के बाद भविष्य में ऐसे आयोजनों पर निगरानी और अधिक कड़ी हो सकती है।

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