शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की संवेदनशील और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हिंदुस्तान-तिब्बत सीमा सड़क की खस्ताहाल स्थिति पर गहरा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कामकाज पर बेहद तीखी और गंभीर टिप्पणियां की हैं। सीधे तौर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के इस विभाग को आड़े हाथों लेते हुए अदालत ने अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

विभाग की स्टैंडर्ड प्रैक्टिस पर की तल्ख टिप्पणी

हिमाचल हाईकोर्ट ने विक्रमादित्य के लोक निर्माण विभाग की स्टैंडर्ड प्रैक्टिस पर भी तल्ख टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। अदालत ने कहा कि यह लोक निर्माण विभाग की एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस (स्थापित ढर्रा) बन चुकी है। वह हमेशा बारिश शुरू होने से ठीक पहले सड़कों का काम शुरू करते हैं। इसके बाद जब काम खराब होता है, तो सारी जिम्मेदारी और ठीकरा खराब मौसम पर मढ़ दिया जाता है। मानसून के दौरान किया जाने वाला पैचवर्क बारिश की मार नहीं झेल पाएगा।

 

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अदालत ने साफ किया कि भले ही केंद्र सरकार से इस सड़क के लिए फंड मिल जाए, लेकिन मानसून के दौरान किसी भी तरह का काम पूरी तरह सस्पेंड रहेगा। विभाग को आदेश दिए गए हैं कि बरसात शुरू होने से ठीक पहले कोई नया पैचवर्क न किया जाए, बल्कि बारिश खत्म होने के बाद सितंबर महीने में ही दोबारा काम को सिरे से शुरू किया जाए।

अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर उठे सवाल

अदालत ने मामले से जुड़े ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही पर कड़े सवाल दागे। कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि विभाग द्वारा पेश किए गए हलफनामों में लापरवाह ठेकेदारों को किए गए कुल भुगतान और उन पर लगाए गए जुर्माने की कोई स्पष्ट और पारदर्शी डिटेल नहीं दी गई है। हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जब तक इस हाईवे के लिए नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक विक्रमादित्य सिंह का विभाग (पीडब्ल्यूडी) इस पूरी सड़क को हर हाल में चलने योग्य स्थिति में बनाए रखेगा।

 

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सेब बेल्ट और पावर प्रोजेक्ट्स की लाइफलाइन पर भ्रष्टाचार का ग्रहण

पीडब्ल्यूडी ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में यह स्वीकार किया है कि ढली से नारकंडा के बीच यह राष्ट्रीय राजमार्ग इस समय बेहद बदहाल और क्षतिग्रस्त स्थिति में है। गौरतलब है कि यह हाईवे शिमला जिला की समृद्ध सेब बेल्ट और किन्नौर की बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं (जलविद्युत परियोजनाएं) के लिए एकमात्र लाइफलाइन माना जाता है।

कंपनी पर लगाए जुर्माने से हाईकोर्ट असंतुष्ट

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2024 के बीच इस सड़क पर करोड़ों की लागत से टारिंग (तारकोल बिछाने) का काम हुआ था, जो वर्ष 2023 और 2025 के मानसून की बारिश में पूरी तरह बह गया। इस काम में गणपति ट्रेडर्स और डीसीसी बिल्डकॉन नामक कंपनियों ने भारी कोताही बरती थी, जिसके बाद उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर जुर्माना लगाने का दावा किया गया है, हालांकि कोर्ट जुर्माने के आंकड़ों से संतुष्ट नजर नहीं आया।

 

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1 जुलाई की सुनवाई में तलब किए शीर्ष अधिकारी

इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 1 जुलाई को मुकर्रर की गई है। हिमाचल हाईकोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए यह तय किया गया है कि अगली सुनवाई में संबंधित विभाग के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। विक्रमादित्य सिंह के विभाग के लिए अब यह प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है कि वे इस महत्वपूर्ण मार्ग को मानसून से पहले और बाद में किस तरह सुरक्षित और सुगम बनाए रखते हैं।

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