शिमला/ऊना। हिमाचल प्रदेश के सुप्रसिद्ध और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे के कथित दुरुपयोग का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। माa के चरणों में अर्पित दान की धनराशि और संपत्तियों के खुलेआम निजी और विभागीय इस्तेमाल पर कड़ा संज्ञान लेते हुए] हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ऊना के उपायुक्त और पुलिस विभाग द्वारा इस्तेमाल की जा रही लग्जरी गाड़ियों को तुरंत जब्त करने के ऐतिहासिक आदेश जारी किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मंदिर न्यास की संपत्तियों के इस तरह के गैर-कानूनी इस्तेमाल पर न केवल नाराजगी जताई, बल्कि कड़े निर्देश भी दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर के चढ़ावे या दान से खरीदी गई संपत्तियों का उपयोग निर्धारित नियमों के तहत ही होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट ने यह सख्त रुख मंदिर न्यास के ही एक ट्रस्टी और याचिकाकर्ता अंकुर कालिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपनाया। याचिका में आरोप लगाया गया कि मां चिंतपूर्णी मंदिर को दान में मिली गाड़ियां और भक्तों के पैसे से खरीदी गई संपत्तियों का इस्तेमाल मंदिर के कार्यों के बजाय सरकारी अधिकारी अपने निजी और विभागीय रसूख के लिए कर रहे हैं।
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दो गाड़ियों को जब्त करने के आदेश
दरअसल मंदिर के चढ़ावे से खरीदी गई एक गाड़ी टोयोटा इनोवा क्रिस्टा का उपयोग ऊना के वर्तमान उपायुक्त जतिन लाल द्वारा किया जा रहा था, जबकि मंदिर को दान में मिली दूसरी गाड़ी महिंद्रा बोलेरो का इस्तेमाल पुलिस विभाग ऊना कर रहा था। अदालत ने इसे नियमों के विरुद्ध मानते हुए संबंधित गाड़ियों को 5 दिनों के भीतर वापस करने और सुरक्षित अभिरक्षा में रखने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने इनसे मांगा जवाब
अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (भाषा, कला एवं संस्कृति), सह-मुख्य आयुक्त (मंदिर), ऊना के वर्तमान DC जतिन लाल और तत्कालीन DC राघव शर्मा (वर्तमान में निदेशक, पंचायती राज विभाग) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही 2022 से 2024 के बीच मंदिर ट्रस्ट द्वारा उपयोग में लाई गई सभी गाड़ियों की लॉगबुक, रिकॉर्ड और पूरी जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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दो करोड़ से अधिक की वसूली की मांग
याचिका में यह भी मांग उठाई गई है कि यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों से 2 करोड़ 29 लाख 75 हजार 428 रुपये की राशि ब्याज सहित व्यक्तिगत रूप से वसूल की जाए। साथ ही, उन्हें ₹30 लाख का व्यक्तिगत बांड पेश करने के लिए भी कहा गया है।
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4 जून को होगी अगली सुनवाई
इस पूरे प्रकरण ने राज्य सरकार और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मां के चढ़ावे का इस्तेमाल सरकारी सुविधाओं के लिए करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगते हुए मामले की अगली सुनवाई 4 जून को तय की है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और दोषी अधिकारी कोर्ट के इस सख्त आदेश पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और मंदिर न्यास की संपत्तियों के दुरुपयोग के इस बड़े खेल में और क्या-क्या खुलासे होते हैं।
