शिमला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 27 फीसदी जवाबी शुल्क लगाने के बाद अब केंद्र सरकार वॉशिंगटन सेब पर आयात शुल्क को और कम करने जा रही है। हिमाचल में इन अमेरिकी सेब के आने से बागवानों की आय पर बड़ा असर पड़ा है। ऐसे में राज्य के सेब उत्पादक बागवान चिंतित हैं।
तबाह हो जाएगी सेब की खेती
हिमाचल में किसान-बागवानों के सबसे बड़े संगठन संयुक्त किसान मंच ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह वॉशिंगटन सेब पर ड्यूटी घटाने की जगह आयात शुल्क बढ़ाए। संगठन के नेताओं ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क घटाने को राजी हो गया है।
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संयुक्त किसान मंच का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेगा। केंद्र सरकार को हिमाचल प्रदेश के हितों का ध्यान रखते हुए ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।
दो साल पहले शुल्क घटाया था
भारत में वॉशिंगटन सेब के आयात पर वर्तमान में 50% का आयात शुल्क लागू है। 2019 में भारतीय स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर अमेरिकी शुल्क के जवाब में भारत ने अमेरिकी सेब पर 20% अतिरिक्त शुल्क लगाया था। इससे वॉशिंगटन सेब पर आयात शुल्क 70% हो गया था। लेकिन सितंबर 2023 में भारत ने अमेरिकी सेब पर 20% अतिरिक्त शुल्क को हटा दिया था
अक्टूबर-नवंबर में होगा ऐलान
अब भारत-अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर जारी वार्ता में यह निकलकर सामन आया है कि वॉशिंगटन सेब पर आयात शुल्क को और कम किया जा सकता है।
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दोनों देशों की वार्ता में इस पर सहमति बनी है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा व्यापार संधि के ऐलान के बाद होगी, जो कि इसी साल अक्टूबर या नवंबर के दौरान हो सकती है।
बाजार में अमेरिकी सेब से मुकाबला
हिमाचल के बागवानों की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर वॉशिंगटन सेब पर आयात शुल्क कम हो जाए तो राज्य में अमेरिकी सेब की भरमार हो जाएगी और हिमाचली सेब से उसका बाजार में तगड़ा मुकाबला होगा। इससे स्थानीय उत्पादकों को नुकसान तो होगा ही, बागवान अपनी उपज की लागत भी नहीं वसूल पाएंगे। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने की मांग है कि अमेरिका के टैरिफ के विरोध में भारत भी वाशिंगटन सेब पर प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाए।
