मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में एक परिवार का तीर्थ यात्रा अनुभव उस समय भयावह बन गया जब शिकारी देवी मंदिर के दर्शन के बाद वे जंगल में रास्ता भटक गए। नेरचौक के डडोर क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल राजेंद्र कुमार अपने परिवार और एक स्थानीय युवती के साथ शिकारी माता के दर्शन को निकले थे।
जंगल में भटके रास्ता
जानकारी के अनुसार, राजेंद्र कुमार का परिवार 23 अक्टूबर को जंजैहली में एक होम स्टे में ठहरा हुआ था। शिकारी माता के दर्शन करने के बाद उन्होंने सोचा कि बूढ़ा केदार मंदिर तक जंगल के पैदल रास्ते से जाएंगे, लेकिन रास्ते में अचानक आई तेज़ बारिश, कोहरा और अंधेरा उनके लिए मुसीबत बन गया।
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रास्ता भटकने के बाद परिवार का संपर्क बाहरी दुनिया से टूट गया। जब देर शाम तक वे वापस नहीं लौटे, तो होम स्टे संचालक ने फोन मिलाने की कोशिश की, पर नेटवर्क न होने के कारण संपर्क नहीं हो पाया। जब रात गहराने लगी और उनका कोई पता नहीं चला, तो ग्रामीणों व पुलिस को सूचना दी गई।
SDRF ने सकुशल ढूंढ निकाला
सूचना मिलते ही जंजैहली थाना पुलिस, SDRFऔर स्थानीय ग्रामीणों ने बचाव अभियान शुरू किया। घने जंगल, ठंड और लगातार बारिश के बावजूद सभी टीमें पूरी रात सर्च ऑपरेशन में जुटी रहीं। प्रशासन ने मंडी से क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी रवाना किया और मोबाइल लोकेशन के आधार पर खोज क्षेत्र को सीमित किया गया, जो उप तहसील छतरी के आसपास दिखा।
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रात करीब 2 बजे SDRF की टीम रुहाड़ा क्षेत्र में पहुंची और तड़के साढ़े छह बजे के आसपास परिवार को सकुशल ढूंढ निकाला गया। इस पूरे बचाव अभियान का नेतृत्व एसडीएम थुनाग मनु वर्मा ने किया, जो पूरी रात मौके पर मौजूद रहीं और हर गतिविधि की निगरानी करती रहीं। पुलिस, राजस्व विभाग, होम गार्ड, दमकल विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों ने समन्वय के साथ काम करते हुए परिवार को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।
अपने स्तर पर खोज चुके थे ग्रामीण
गांव के उपप्रधान ने बताया कि शुरू में तीन खोज दल बनाए गए, एक दल बूढ़ा केदार की दिशा में दूसरा रायगढ़ से मुख्य सड़क की ओर और तीसरा देज्जी से पखथियार की ओर रवाना किया गया। जब शुरुआती खोज में कोई सफलता नहीं मिली, तब जिला आपातकालीन संचालन केंद्र मंडी के माध्यम से SDRF को बुलाया गया।
