शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के सामने प्रदेश के कई बड़े और लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री ने एक ही दिन में चार केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर हिमाचल की आर्थिक स्थिति, आपदा प्रभावित क्षेत्रों, जलविद्युत परियोजनाओं, पर्यावरणीय मंजूरियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की।

 

दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की सबसे अहम मांगों में हिमाचल की कर्ज सीमा बढ़ाकर जीडीपी के 5 प्रतिशत करने, प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी करने और प्रदेश को विभिन्न केंद्रीय परियोजनाओं में उसका उचित हक दिलाने के मुद्दे शामिल रहे।

वित्त मंत्री के सामने हिमाचल की आर्थिक स्थिति का मुद्दा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान प्रदेश की वित्तीय जरूरतों को केंद्र के सामने रखा। सीएम ने हिमाचल की कर्ज सीमा को बढ़ाकर जीडीपी के 5 प्रतिशत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश की आर्थिक परिस्थितियों और मौजूदा वित्तीय दबाव को देखते हुए हिमाचल को अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश की आवश्यकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि जल्द जारी करने का भी आग्रह किया।

 

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बाढ़ के बाद नदियों में जमा मलबे का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक में हिमाचल में बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद पैदा होने वाली गंभीर समस्या को उठाया। सीएम ने कहा कि भारी बारिश और बाढ़ के बाद प्रदेश की नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदी की जल वहन क्षमता प्रभावित होती है और आसपास बसे लोगों के साथ-साथ सड़कों, पुलों तथा अन्य बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ जाता है। मुख्यमंत्री ने नदियों की जल वहन क्षमता बहाल करने के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग की अनुमति देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

 

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ऊर्जा मंत्री के सामने शानन प्रोजेक्ट लौटाने की मांग

दिल्ली में मुख्यमंत्री की केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ हुई मुलाकात भी काफी अहम रही। बैठक में हिमाचल के बिजली क्षेत्र से जुड़े कई पुराने और महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।
इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा शानन जलविद्युत परियोजना को हिमाचल को वापस सौंपने का रहा। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को हिमाचल के हित में राज्य को हस्तांतरित करने की मांग दोहराई। शानन परियोजना लंबे समय से हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है और सरकार लगातार इसे प्रदेश को लौटाने की मांग उठाती रही है।

 

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बैरा स्यूल प्रोजेक्ट भी हिमाचल को सौंपने की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के समक्ष 180 मेगावाट की बैरा स्यूल जलविद्युत परियोजना का मामला भी उठाया। उन्होंने परियोजना की 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद इसे हिमाचल प्रदेश को सौंपने की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने जलविद्युत परियोजनाओं से प्रदेश को मिलने वाले लाभ और राज्य के अधिकारों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी केंद्र के समक्ष अपनी बात रखी।

मुफ्त बिजली के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र का मामला

बैठक में हिमाचल की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को मिलने वाले मुफ्त बिजली हिस्से के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाने की मांग रखी। इसके अलावा वर्ष 2008 की जलविद्युत नीति से पहले शुरू हुई केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं में स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के लिए अतिरिक्त एक प्रतिशत मुफ्त बिजली देने की राज्य की मांग भी दोहराई। सरकार के आकलन के अनुसार इस व्यवस्था से हिमाचल को करीब 29.34 करोड़ रुपये सालाना का लाभ मिल सकता है।

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एसजेवीएनएल में हिमाचल के दो स्वतंत्र निदेशक बनाने की मांग

मुख्यमंत्री ने एसजेवीएनएल के निदेशक मंडल में हिमाचल की भागीदारी बढ़ाने की मांग भी रखी। उन्होंने हिमाचल की ओर से बोर्ड में दो स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री का कहना था कि प्रदेश में जलविद्युत संसाधनों के व्यापक इस्तेमाल और परियोजनाओं से जुड़े हितों को देखते हुए निर्णय प्रक्रिया में हिमाचल की उचित भागीदारी जरूरी है।

बीबीएमबी की अनुपयोगी जमीन हिमाचल को देने का मामला भी उठा

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बीबीएमबी के पास प्रदेश में उपलब्ध अधिकृत लेकिन अनुपयोगी भूमि को हिमाचल सरकार के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करवाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसी भूमि का इस्तेमाल सरकारी कार्यालयों की जरूरतों और परियोजना प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

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हिमाचल के हितों को दिल्ली में मजबूती से रखने का दावा

मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा ऐसे समय में हुआ है जब हिमाचल सरकार प्रदेश की वित्तीय स्थिति के साथ-साथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण, जलविद्युत संसाधनों और पर्यावरणीय मंजूरियों से जुड़े कई मामलों पर केंद्र से सहयोग की मांग कर रही है। एक ओर सीएम ने कर्ज सीमा बढ़ाने और 1500 करोड़ रुपये की सहायता का मुद्दा उठाया, तो दूसरी ओर शानन और बैरा स्यूल जैसे बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट हिमाचल को लौटाने की मांग रखी।

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