#अपराध

September 8, 2026

हिमाचल में नाई ने नशा बेच खड़ा किया साम्राज्य : गाड़ी-बंगला समेत 1.64 करोड़ की प्रॉपर्टी सीज

2024 और 2025 में NDPS मामलों में इस प्रकार की वित्तीय जांच नहीं की गई थी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई का दायरा और व्यापक कर दिया है। अब पुलिस केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह रही- बल्कि नशे के कारोबार से अर्जित कथित अवैध संपत्तियों और आर्थिक नेटवर्क पर भी शिकंजा कस रही है।

नाई ने नशा बेच खड़ा किया साम्राज्य

इसी कड़ी में शिमला पुलिस ने NDPS एक्ट के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एक आरोपित नाई और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच के बाद 1.64 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें सीज किया है।

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काफी समय से कर रहा था अफीम तस्करी

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपित लंबे समय से अफीम की तस्करी के कथित कारोबार से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों में अफीम की आपूर्ति करता था। मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच को केवल बरामदगी तक सीमित न रखते हुए आरोपित की आय, बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन पड़ताल शुरू की।

NDPS एक्ट का मामला दर्ज

मामला पुलिस थाना ठियोग में 10 जून 2026 को दर्ज किया गया था। पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि रहीघाट क्षेत्र में हॉस्पिटल रोड स्थित एक नाई की दुकान में नशीला पदार्थ रखा गया है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए दुकान में तलाशी अभियान चलाया।

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हैपी की दुकान से नशा बरामद

तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपित सोहन लाल उर्फ हैपी के कब्जे से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद की। इसके बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 18 के तहत दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी।

काले धंधे से कितना पैसा कमाया?

प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस का ध्यान केवल अफीम की बरामदगी तक नहीं रहा। पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि आरोपित नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त कब से कर रहा था, उसका नेटवर्क किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था और इस कथित अवैध कारोबार से कितनी आर्थिक कमाई की गई।

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खंगाली गई पूरी जानकारी

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने आरोपित की वित्तीय गतिविधियों की भी विस्तृत जांच शुरू की। इस दौरान आरोपित और उसके करीबी सहयोगियों के बैंक खातों, आय के स्रोतों, संपत्ति खरीदने के रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण किया गया।

बैंक खातों की छानबीन

पुलिस ने जांच के दौरान यह भी देखा कि आरोपित और उससे जुड़े लोगों की घोषित आय कितनी है और उनके पास मौजूद संपत्तियों व वित्तीय संसाधनों का स्रोत क्या है। आय के ज्ञात और वैध स्रोतों की तुलना संपत्तियों और खातों में मौजूद धनराशि से की गई। इस वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने करीब 1.64 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियों की पहचान की।

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दुकान, जमीन और वाहन सीज

शिमला पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान आरोपित से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संपत्तियों का पता चला है। इनमें एक आवासीय भूमि प्लॉट, कृषि भूमि, दो मंजिला दुकान और एक वाहन शामिल है। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों और डाकघर खातों में जमा धनराशि को भी जांच के दायरे में लिया गया।

करोड़ों की संपत्ति भी जब्त

इन सभी संपत्तियों और वित्तीय संसाधनों का मूल्यांकन करने के बाद करीब 1.64 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की पहचान की गई है। पुलिस ने संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत इन संपत्तियों को सीज करने की कार्रवाई की है।

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संपत्तियों पर कार्रवाई करना जरूरी

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी करना पर्याप्त नहीं है। अगर तस्करी से कमाए गए कथित अवैध धन और उससे बनाई गई संपत्तियों पर कार्रवाई नहीं होती- तो आरोपी जेल से बाहर आने के बाद दोबारा अपना नेटवर्क खड़ा कर सकते हैं।

वर्ष 2026 में 12 मामलों की हुई वित्तीय जांच

शिमला पुलिस ने वर्ष 2026 में नशा तस्करी के मामलों में वित्तीय जांच को विशेष प्राथमिकता दी है। पुलिस के अनुसार, इस वर्ष अब तक 12 एनडीपीएस मामलों में आरोपितों की वित्तीय गतिविधियों की जांच की जा चुकी है।

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चल-अचल संपतियां सीज

इन मामलों में पुलिस ने चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय संसाधनों की पड़ताल की है। अब तक इन मामलों में आठ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों को सीज किया जा चुका है।

2024 और 2025 में नहीं हुई ऐसी कार्रवाई

यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2024 और 2025 में NDPS मामलों में इस प्रकार की वित्तीय जांच नहीं की गई थी। उन वर्षों में नशा तस्करी के मामलों में आरोपितों की संपत्तियों और आर्थिक स्रोतों की इस स्तर पर जांच कर उन्हें सीज करने की कार्रवाई सामने नहीं आई थी।

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अब आर्थिक नेटवर्क पर चोट करने की रणनीति

हिमाचल प्रदेश पुलिस अब नशा तस्करों के खिलाफ अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है। पहले कार्रवाई मुख्य रूप से नशीले पदार्थों की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी तक केंद्रित रहती थी, लेकिन अब पुलिस उनके आर्थिक ढांचे को भी निशाना बना रही है।

पूरा आर्थिक नेटवर्क करता है काम

पुलिस का मानना है कि नशे का कारोबार केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं होता- बल्कि इसके पीछे एक पूरा आर्थिक नेटवर्क काम करता है। नशीले पदार्थों की खरीद, बिक्री, परिवहन और वितरण से होने वाली कमाई को अलग-अलग माध्यमों से संपत्तियों और खातों में लगाया जा सकता है।

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कहां-कहां निवेश किया गया पैसा?

ऐसे में वित्तीय जांच के जरिए इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने पर जोर दे रही है कि नशे के कारोबार से होने वाला पैसा कहां निवेश किया गया, किन लोगों के खातों में पहुंचा और उससे कौन-कौन सी संपत्तियां बनाई गईं।

नशा कारोबार की कमर तोड़ने की तैयारी

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नशा तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए उनके आर्थिक संसाधनों को खत्म करना बेहद जरूरी है। यदि अवैध कारोबार से अर्जित धन और संपत्तियों को निशाना बनाया जाता है तो तस्करों की आर्थिक ताकत कमजोर होगी और उनके लिए दोबारा नेटवर्क खड़ा करना मुश्किल हो जाएगा।

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शिमला पुलिस की यह कार्रवाई नशा तस्करी के खिलाफ बदलती रणनीति का संकेत मानी जा रही है। आने वाले समय में अन्य NDPS मामलों में भी आरोपितों की वित्तीय गतिविधियों की जांच तेज होने की संभावना है।

नशा तस्करों के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई

पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। नशीले पदार्थों की तस्करी से कथित तौर पर अर्जित हर अवैध संपत्ति और आर्थिक संसाधन की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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