#विविध

September 8, 2026

सावधान हिमाचल! कैंसर के मामले तेजी से बढ़े, हर साल 16 हजार मरीज; खान-पान बना बड़ी वजह

आंत, स्तन और ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा

शेयर करें:

himachal cancer patients cases increased risk factors 16 thousand per year

शिमला। हिमाचल प्रदेश में कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। प्रदेश के अस्पतालों में हर साल कैंसर के करीब 16 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें आंत के कैंसर के मामले सबसे अधिक बताए जा रहे हैं। इसके बाद स्तन कैंसर और ओरल कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है।

कैंसर के मामले तेजी से बढ़े

विशेषज्ञों के अनुसार खान-पान में बदलाव, रेड मीट का अधिक सेवन, धूम्रपान, फसलों में कीटनाशकों और रासायनिक पदार्थों का अत्यधिक इस्तेमाल, वायु प्रदूषण और बदलती जीवनशैली जैसे कई कारक कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : काम पर गया पति 4 दिन से लापता, तलाश में दर-दर भटक रही बेबस पत्नी- करें मदद

आकंड़े देख चौंक जाएंगे आप

प्रदेश में कैंसर के वास्तविक मामलों का आंकड़ा इससे भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हिमाचल से बड़ी संख्या में मरीज बेहतर या विशेष उपचार के लिए चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और देश के अन्य राज्यों के अस्पतालों का रुख करते हैं।

हिमाचल में कैंसर की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा

कैंसर को लेकर किए गए एक अध्ययन में हिमाचल प्रदेश में स्व-रिपोर्टेड कैंसर की दर में लगातार वृद्धि की बात सामने आई है। अध्ययन के अनुसार प्रदेश में यह दर सालाना करीब 2.2 फीसदी की गति से बढ़ रही है, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 0.6 फीसदी बताया गया है। पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच हिमाचल में भी स्थिति को लेकर विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : पोते ने पूरा किया दादा का सपना, भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन बढ़ाया मान

प्रदेश में कैंसर की जांच और मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर करने की सुविधाओं में पिछले कुछ समय में सुधार हुआ है। इसका फायदा दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी मिल रहा है। पहले जहां कई मरीज जांच और उपचार के लिए बड़े शहरों तक नहीं पहुंच पाते थे, वहीं अब स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुंच के कारण अस्पतालों में मरीजों की पहचान और उपचार का आंकड़ा बढ़ा है।

IGMC के टर्शरी कैंसर सेंटर के मरीजों पर अध्ययन

आईजीएमसी शिमला के टर्शरी कैंसर सेंटर में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को लेकर कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने पिछले वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन किया है। यह शोध जून 2026 में मेडलेटर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में मरीजों की उम्र और कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया।

यह भी पढ़ें- IGMC में गजब का मामला- 2 वर्षीय मासूम ने निगली हेयर क्लिप, डॉक्टरों ने बिना सर्जरी किए निकाली

किस उम्र के लोगों में ज्यादा खतरा

अध्ययन के अनुसार, 58 से 67 वर्ष की आयु के लोगों में कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। वहीं, 38 से 57 वर्ष की मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में भी कैंसर का जोखिम बढ़ता हुआ देखा गया है। विशेषज्ञों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कम उम्र में कैंसर की पहचान होने पर उपचार और बीमारी के प्रबंधन के लिए समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं।

खान-पान बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार असंतुलित खान-पान और रेड मीट का अत्यधिक सेवन आंतों से जुड़े कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हो सकता है। प्रदेश में आंत के कैंसर के अधिक मामले सामने आने के पीछे खान-पान की आदतों को भी एक संभावित कारण माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल DPS रैगिं**ग केस : प्रिंसिपल पर लगे गंभीर आरोप, 5 स्टूडेंट्स सस्पेंड- आज होगी पूछताछ

किसी एक कारण से नहीं होता कैंसर

हालांकि, कैंसर किसी एक कारण से नहीं होता। इसके पीछे आनुवंशिक, पर्यावरणीय, जीवनशैली और अन्य कई कारकों की भूमिका हो सकती है। ऐसे में विशेषज्ञ संतुलित आहार लेने, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचने और भोजन में पर्याप्त फल-सब्जियां शामिल करने पर जोर देते हैं।

खेती में रसायनों के इस्तेमाल पर भी सवाल

हिमाचल की अर्थव्यवस्था में बागवानी और कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। सेब के बगीचों तथा सब्जियों की फसलों में कीटनाशकों और रासायनिक खादों का इस्तेमाल किया जाता है। अत्यधिक या अनुचित इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। ऐसे रसायनों के पर्यावरण, खाद्य पदार्थों और पानी पर संभावित प्रभाव को लेकर लगातार अध्ययन की जरूरत बताई जा रही है। कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर सावधानी, निर्धारित मात्रा का पालन और सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : 36 घंटे से पांच वर्षीय आर्या लापता, खोज में जुटी NDRF और पुलिस टीम- हाथ खाली

धूम्रपान से फेफड़ों और गले के कैंसर का खतरा

बीड़ी, सिगरेट और हुक्के का सेवन कैंसर के प्रमुख ज्ञात जोखिम कारकों में शामिल है। विशेष रूप से लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़ों और मुंह-गले से संबंधित कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

तंबाकू से भी बढ़ रहा खतरा

हिमाचल में पारंपरिक रूप से हुक्के के इस्तेमाल के साथ-साथ तंबाकू सेवन की अन्य आदतें भी चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ना कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। इसके साथ ही तंबाकू के अन्य उत्पादों से भी दूरी बनाना जरूरी है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल के मुद्दे लेकर दिल्ली पहुंचे CM सुक्खू- आज 3 केंद्रीय मंत्रियों से करेंगे मुलाकात

बदलती जीवनशैली और प्रदूषण भी संभावित कारक

आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित भोजन, बढ़ता वजन और अन्य जीवनशैली से जुड़े बदलाव भी कई प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय परिस्थितियों को लेकर भी विशेषज्ञों की चिंता बनी हुई है।

 

कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए केवल अस्पतालों में उपचार की सुविधाएं बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। बीमारी की रोकथाम, जागरूकता और समय पर जांच पर भी उतना ही जोर देना जरूरी है।

यह भी पढ़ें- सुक्खू सरकार में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट- मुख्यमंत्री के बाद डिप्टी CM भी दिल्ली रवाना

समय पर जांच से उपचार में मिल सकती है मदद

  • कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर कई मामलों में उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है।
  • लोगों को शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए।
  • 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्तन कैंसर की जांच और मैमोग्राफी पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
  • पुरुषों और महिलाओं दोनों को शरीर में किसी असामान्य गांठ, लंबे समय तकबने रहने वाले लक्षण, बिना स्पष्ट कारण वजन कम होने या अन्य असामान्य बदलाव की स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

यह भी पढ़ें- हिमाचल के सरकारी स्कूलों में गैस खत्म...शिक्षक घर से ढो रहे इंडक्शन-हीटर, मिड-ले मील पर संकट

हिमाचल में आधुनिक उपचार सुविधाएं

प्रदेश में कैंसर के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। आईजीएमसी शिमला का टर्शरी कैंसर सेंटर गंभीर मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपचार केंद्र के रूप में काम कर रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज बेहतर या विशेष उपचार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं।

हर साल 16 हजार नए मरीज

टर्शरी कैंसर सेंटर शिमला के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गुप्ता के अनुसार, प्रदेश में हर साल करीब 16 हजार नए कैंसर मरीज सामने आते हैं- जिनमें आंत के कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं। उनके मुताबिक प्रदेश में आने वाले कुल मरीजों में लगभग आधे ही अपना उपचार यहीं करवाते हैं। जबकि बाकी मरीज बाहरी राज्यों का रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी कैंसर के अत्याधुनिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं और रेड मीट के अधिक सेवन तथा धूम्रपान जैसे जोखिम कारकों से बचाव जरूरी है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख