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September 7, 2026

हिमाचल: संजौली के बाद अब एक और मस्जिद में अवैध निर्माण, कोर्ट ने दिए बुलडोजर चलाने के आदेश

2013 से चल रहा था मामला, अब आया मस्जिद को लेकर बड़ा फैसला

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Shimla Mosque case

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मस्जिदों से जुड़े अवैध निर्माण के मामले एक बार फिर सुर्खियों में हैं। संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर लंबे समय तक चले विवाद और कानूनी कार्रवाई के बाद अब शहर के बालूगंज स्थित एक मस्जिद परिसर में किए गए कथित अवैध निर्माण पर नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने संबंधित अवैध दीवार को हटाने के आदेश दिए हैं। हालांकि, यह आदेश पूरी मस्जिद को गिराने के लिए नहीं, बल्कि नियमों के विपरीत बनाए गए संबंधित निर्माण को हटाने तक सीमित है।

संजौली के बाद फिर मस्जिद का अवैध निर्माण चर्चा में

शिमला में संजौली मस्जिद का मामला पिछले कुछ वर्षों में सबसे चर्चित अवैध निर्माण विवादों में रहा है। इसी पृष्ठभूमि में बालूगंज मस्जिद से जुड़ा नगर निगम का ताजा फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर निगम आयुक्त की अदालत ने वर्ष 2013 से लंबित मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद मस्जिद परिसर में बनाई गई एक दीवार को अवैध मानते हुए उसे गिराने के निर्देश दिए हैं।

 

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बालूगंज मस्जिद में क्या मिला अवैध?

नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, बालूगंज स्थित मस्जिद परिसर में पुराने शौचालयों की दीवार को बिना आवश्यक अनुमति के दोबारा बनाया गया था। जांच में सामने आया कि नई बनाई गई दीवार पुरानी निर्धारित सीमा से करीब डेढ़ से दो फीट बाहर तक बनाई गई थी। नगर निगम की ओर से इसी निर्माण को नियमों के विपरीत माना गया है।

मस्जिद पक्ष ने क्या दी दलील?

मामले की सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से निर्माण को सुविधा के लिहाज से किया गया बताया गया। साथ ही जमीन पर अपने अधिकार का भी तर्क रखा गया। हालांकि, नगर निगम आयुक्त कोर्ट ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और निर्माण से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद संबंधित दीवार को हटाने का आदेश जारी किया।

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20 मामलों में छह पर फैसला

शनिवार को शिमला नगर निगम आयुक्त की अदालत में अवैध निर्माण से जुड़े कुल 20 मामलों में से छह मामलों पर फैसला सुनाया गया। इनमें बालूगंज के अलावा न्यू शिमला, खलीनी, पंथाघाटी और फ्लावरडेल से जुड़े मामले भी शामिल बताए गए हैं। नगर निगम की कार्रवाई का उद्देश्य स्वीकृत नक्शे और निर्धारित नियमों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करना है।

बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बढ़ी चर्चा

बालूगंज मस्जिद की दीवार हटाने के आदेश के बाद शहर में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हिंदू संगठन देवभूमि संघर्ष समिति के पदाधिकारी विजय शर्मा ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संगठन पहले भी बालूगंज समेत शिमला की कुछ मस्जिदों में कथित अवैध निर्माण का मुद्दा उठाता रहा है।

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अभी पूरी मस्जिद नहीं होगी ध्वस्त

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नगर निगम आयुक्त कोर्ट का मौजूदा आदेश पूरी बालूगंज मस्जिद को गिराने का नहीं है। आदेश संबंधित अवैध माने गए निर्माण यानी दीवार को हटाने से जुड़ा है। इसलिए इसे पूरी मस्जिद पर बुलडोजर चलाने का आदेश कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। कार्रवाई फिलहाल उसी हिस्से तक सीमित है जिसे नगर निगम अदालत ने नियमों के विपरीत माना है।

मस्जिद कमेटी के अगले कदम पर नजर

फैसले के बाद अब नजर इस बात पर है कि मस्जिद कमेटी नगर निगम के आदेश को स्वीकार करती है या इसे जिला अदालत में चुनौती देती है। फिलहाल कमेटी की ओर से इस संबंध में अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया गया है। यदि मामला आगे अदालत में जाता है तो निर्माण हटाने की कार्रवाई पर कानूनी प्रक्रिया का असर पड़ सकता है।

 

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संजौली मस्जिद विवाद से जुड़ा पुराना मामला

शिमला का संजौली मस्जिद विवाद वर्ष 2024 में प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना था। स्थानीय स्तर पर मस्जिद के निर्माण को लेकर पहले से आपत्तियां उठाई जाती रही थीं और नगर निगम में वर्ष 2010 में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मामला लंबे समय तक नगर निगम आयुक्त की अदालत में चलता रहा और करीब 50 सुनवाइयों के बाद मामले में महत्वपूर्ण आदेश सामने आए।

बाद में पूरी इमारत को लेकर आया आदेश

3 मई 2025 को नगर निगम आयुक्त की अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए मस्जिद के पूरे निर्माण को अवैध घोषित कर उसे गिराने का आदेश दिया। हालांकि, इसके बाद मामला जिला अदालत और हाईकोर्ट तक पहुंचा और विभिन्न स्तरों पर कानूनी कार्रवाई जारी रही। अक्टूबर 2025 में जिला अदालत ने नगर निगम की कार्रवाई से जुड़े अवैध हिस्से को हटाने के आदेश को बरकरार रखा, जबकि दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट की ओर से ग्राउंड और पहली मंजिल को लेकर यथास्थिति संबंधी आदेश दिया गया था।

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