शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए फिर 1300 करोड़ का लोन उठाएगी। सरकारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, केंद्र सरकार ने लोन की अनुमति दे दी है। यह लोन रिजर्व बैंक से 7 और 9 साल के लिए लिया जाएगा। इसी अप्रैल महीने की 30 तारीख को सरकारी खजाने में 1300 करोड़ रुपए आ जाएंगे।
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आपको बता दें कि सुक्खू सरकार को हर महीने सैलरी और पेंशन देने के लिए 2000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। तकरीबन हर बार सरकार को इसके लिए बाहर से लोन लेना पड़ रहा है। इससे पहले सुक्खू सरकार अप्रैल में 900 करोड़ रुपए का लोन ले चुकी है। इस तरह एक ही महीने में सरकार पर 2200 करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ गया है। इसे मिलाकर हिमाचल सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़कर एक लाख करोड़ रुपए के पार जा चुका है।
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लोन नहीं तो सैलरी-पेंशन नहीं
1300 करोड़ रुपए के नए लोन में सरकार सात साल के लिए 500 करोड़ और 9 साल के लिए 800 करोड़ का लोन ले रही है। इसके लिए रिजर्व बैंक 29 अप्रैल को ऑनलाइन बोली लगाएगा और 30 अप्रैल को राज्य सरकार के खजाने में पैसा आ जाएगा। सुक्खू सरकार राज्य के कर्मचारियों को अब पहली तारीख को सैलरी दे रही है। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति यह है कि अगर सरकार लोन न ले तो राज्य के 2 लाख 42 हजार कर्मचारियों को सैलरी न मिले। इसके अलावा हिमाचल सरकार को 1.89 लाख पेंशनरों को भी समय पर पेंशन देने की जिम्मेदारी है।
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ठेकेदारों, हिम केयर का भी बकाया
केवल यही नहीं, सरकार की विभिन्न योजनाओं का काम कर रहे ठेकेदारों ने हाल में बकाया पेमेंट जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था, जिसके बाद खुद सीएम सुक्खू ने हस्तक्षेप कर पीडब्लूडी और जल शक्ति विभाग में ठेकेदारों के पेंडिंग बिल को 30 अप्रैल तक जारी करने को कहा था। उन्होंने हिम केयर और सहारा योजना की पेंडिंग राशि को भी 30 अप्रैल तक चुकाने के आदेश दिए थे।
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4400 करोड़ के लोन का बोझ
आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार ने केवल 7000 करोड़ रुपए तक का लोन लेने की छूट दी है। सुक्खू सरकार इस साल जनवरी में 2200 करोड़ का लोन ले चुकी है और अप्रैल से नए वित्त वर्ष की अभी शुरुआत ही हुई है। इस तरह इस साल अप्रैल तक सुक्खू सरकार 4400 करोड़ रुपए का लोन ले चुकी है। अभी नया वित्त वर्ष शुरू होने में एक साल का लंबा वक्त बचा हुआ है। ऐसे में देखना यह है कि इस अवधि में सरकार अपने आर्थिक स्रोतों को कितना मजबूर कर पाती है कि उसे और अधिक लोन न लेना पड़े।
बता दें कि 31 मार्च, 2023 तक राज्य पर 76,185 करोड़ रुपए कर्ज था। उसके बाद वर्तमान सरकार ने अब तक 29,046 करोड़ रुपए ऋण लिया है। इस तरह से हिमाचल प्रदेश के सिर पर कर्ज का बोझ एक लाख करोड़ के पार हो गया है।
