हमीरपुर। राजनीति में अक्सर रिश्तों और पहचान की उम्र को सत्ता और समय के तराजू पर तौला जाता है। मगर कुछ संबंध ऐसे होते हैं जो वर्षों बाद भी अपनी गर्माहट नहीं खोते। ऐसा ही एक भावुक और यादगार दृश्य हमीरपुर के समीरपुर में देखने को मिला।

24 साल बाद धूमल से मिले हेमराज

जहां करसोग से पहुंचे हेमराज की प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से 24 वर्षों बाद मुलाकात हुई। यह मुलाकात सिर्फ दो लोगों के मिलने भर की घटना नहीं थी। इस मुलाकात में अपनापन, सम्मान और पुरानी यादों की ऐसी मिठास थी- जिसने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।

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धूमल ने तुरंत पहचान लिया

समीरपुर स्थित आवास पर जब हेमराज पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे तो उन्हें उम्मीद थी कि इतने लंबे समय के बाद शायद उन्हें अपना परिचय देना पड़ेगा। मगर जैसे ही वे प्रो. धूमल के सामने पहुंचे, उन्होंने तुरंत उन्हें पहचान लिया और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया।

खुशी से भावुक हुए हेमराज

वर्षों पुरानी पहचान को इस तरह जीवित देखकर हेमराज भावुक हो उठे। हेमराज के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और आंखों में भावनाओं की नमी भी दिखाई दे रही थी। हेमराज ने कहा कि यू हीं हर कोई धूमल नहीं बन जाता। इसके लिए बड़ा दिल और दूरगामी सोच रखनी पड़ती है।

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कब हुई थी पहली मुलाकात?

हेमराज ने बताया को प्रेम कुमार धूमल से उनकी पहली मुलाकात वर्ष 2002 में हुई थी। उस समय प्रो. धूमल हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और वह एक आवश्यक कार्य को लेकर उनसे मिले थे। उस मुलाकात के बाद जीवन अपनी गति से आगे बढ़ता रहा।

 

 

जिम्मेदारियां बढ़ीं, परिस्थितियां बदलीं और समय का लंबा अंतराल भी गुजर गया। मगर इतने वर्षों बाद जब उन्होंने दोबारा मुलाकात की तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो समय रुका ही नहीं था।

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पुरानी यादों को किया ताजा

मुलाकात के दौरान दोनों ने पुराने दिनों की कई यादों को ताजा किया। बातचीत के बीच कभी हंसी के पल आए तो कभी भावनाओं से भरे क्षण भी देखने को मिले। प्रो. धूमल ने हेमराज के परिवार, गांव और वर्तमान हालात के बारे में विस्तार से जानकारी ली। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में इतने वर्षों बाद किसी व्यक्ति को पहचानना और उसी सम्मान के साथ मिलना बहुत ही कम देखने को मिलता है।

लोगों से जुड़े रिश्ते हमेशा रहते हैं

इस अवसर पर प्रो. धूमल ने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में पद समय के साथ बदलते रहते हैं। मगर लोगों से जुड़े रिश्ते हमेशा बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के लिए जनता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है और लोगों का विश्वास ही सबसे मूल्यवान संपत्ति है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले मिले लोगों की यादें आज भी उनके मन में सुरक्षित हैं और लोगों का स्नेह ही उन्हें निरंतर ऊर्जा देता है।

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जीवन का यादगार पल बनी मुलाकात

हेमराज ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि 24 साल बाद भी प्रो. धूमल उन्हें उसी आत्मीयता के साथ पहचान लेंगे। उन्होंने बताया कि यह पल उनके जीवन की सबसे यादगार घटनाओं में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि जब किसी बड़े नेता द्वारा एक सामान्य व्यक्ति को इतने सम्मान और अपनत्व के साथ याद रखा जाता है, तो यह अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है।

चर्चा का विषय बनी मुलाकात

समीरपुर में हुई यह मुलाकात अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे केवल एक राजनीतिक हस्ती और नागरिक की मुलाकात नहीं, बल्कि मानवीय रिश्तों की खूबसूरती का उदाहरण मान रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सच्ची पहचान पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि लोगों के साथ बनाए गए संबंधों से होती है।

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