कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इन दिनों एक बकरी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जोगणी माता मंदिर के आसपास पहाड़ी में बनी एक गुफा से बकरी के दिन में दो बार बाहर आने की बात कही जा रही है। इसे देखने के लिए फोरलेन के पास लोगों और पर्यटकों की भीड़ जुट रही है।

हिमाचल में नया चमत्कार...

कुछ लोग इस घटना को जोगणी माता से जुड़ी आस्था के साथ जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि बकरी के गुफा में रहने और नियमित रूप से बाहर निकलने के पीछे वास्तविक कारण क्या है, इसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इसे सामान्य घटना मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं।

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गुफा में दिखी बकरी

जोगणी माता मंदिर के नजदीक पहाड़ी पर मौजूद गुफा के आसपास पिछले कुछ समय से लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। दावा किया जा रहा है कि करीब तीन महीने से बकरी रोजाना दो बार गुफा से बाहर आती है। रविवार को भी बकरी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए

दिन में दो बार निकलती है बाहर

भीड़ बढ़ने के कारण फोरलेन पर वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई और कुछ समय के लिए जाम जैसी स्थिति बन गई। लोग सड़क के आसपास खड़े होकर पहाड़ी की ओर देखने लगे। इस दौरान कुछ महिलाएं बकरी को देखकर जमीन पर सिर झुकाकर प्रणाम करती हुई भी नजर आईं।

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'देवी रूप' मान रहे लोग

बकरी के गुफा से बाहर आने की घटना को लेकर स्थानीय लोगों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ लोग इसे जोगणी माता की शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। सावन के महीने में धार्मिक आस्था का माहौल होने के कारण इस घटना को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।

कहां से आई बकरी?

हालांकि, बकरी के गुफा में पहुंचने और वहां रहने की वजह को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी चमत्कार के तौर पर स्थापित तथ्य मानने के बजाय फिलहाल लोगों की मान्यता और चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है।

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प्रत्यक्षदर्शी ने बताई अलग कहानी

मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बकरी को लेकर अलग संभावना जताई। उसके अनुसार यह बकरी किसी चरवाहे के झुंड से अलग होकर यहां पहुंची हो सकती है और बाद में गुफा को सुरक्षित जगह समझकर वहीं रहने लगी।

बकरी के शरीर पर निशान

एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि बकरी किसी गद्दी के झुंड से बिछड़ी हुई हो सकती है। उसने दूर से कैमरे से तस्वीर को जूम करने पर बकरी के शरीर पर एक निशान दिखाई देने की बात कही। उसके अनुसार ऐसे निशान अक्सर चरवाहे अपनी बकरियों और भेड़ों की पहचान के लिए लगाते हैं। हालांकि बकरी वास्तव में किसी पशुपालक से बिछड़ी है या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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बकरी देखने उमड़ी भीड़

रविवार को लोगों की भीड़ के बीच दो-तीन युवक पहाड़ी पर चढ़कर गुफा तक पहुंचने की कोशिश करते भी दिखाई दिए। युवकों ने बकरी को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन लोगों के अनुसार वह उनके हाथ नहीं आई और वहां से भाग गई।

लोगों ने लगाए जयकारे

कुछ देर बाद जब बकरी गुफा से बाहर निकली तो मौके पर मौजूद लोगों ने धार्मिक जयकारे लगाने शुरू कर दिए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आ गईं।

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सोशल मीडिया पर भी छाया मामला

बकरी को लेकर स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चा अब सोशल मीडिया तक पहुंच चुकी है। घटना से जुड़े वीडियो और दावों को लोग अलग-अलग तरीके से साझा कर रहे हैं। वहीं, गुफा तक पहुंचकर बकरी को पकड़ने की कोशिश करने वाले युवकों को लेकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी भी जताई है।

फोरलेन पर लोगों की भीड़

बढ़ती भीड़ को देखते हुए इस पूरे घटनाक्रम में लोगों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो गई है। पहाड़ी क्षेत्र में गुफा तक पहुंचने के प्रयास में फिसलन या गिरने जैसी दुर्घटना का खतरा हो सकता है। इसके अलावा फोरलेन के किनारे भीड़ जमा होने से यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

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आस्था के साथ सावधानी भी जरूरी

बकरी के गुफा से निकलने की घटना ने लोगों में उत्सुकता जरूर पैदा की है, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। किसी प्राकृतिक या सामान्य घटना को धार्मिक चमत्कार मानने से पहले उसके तथ्यात्मक पहलुओं को समझना जरूरी है।

गुफा में ही रहती है बकरी

फिलहाल यह बकरी कुल्लू में स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में अगर पशुपालक की पहचान होती है या बकरी के गुफा में रहने की वजह सामने आती है- तो इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।

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