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September 24, 2026
हिमाचल: फौजी पति पर लगाया भाभी संग अफेयर का आरोप, नहीं मिले सबूत - कोर्ट ने पत्नी को लताड़ा
सेना के अफसरों से भी की थी शिकायत
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शिमला। पति के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाना और फिर उसकी शिकायत सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से करना पत्नी को भारी पड़ गया। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसे आरोपों को, जब वे ठोस सबूतों से साबित न हों और पति की प्रतिष्ठा को प्रभावित करें, वैवाहिक जीवन में मानसिक क्रूरता माना है। अदालत ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट से मिले तलाक के आदेश को बरकरार रखा। यह फैसला न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की खंडपीठ ने 22 सितंबर 2026 को सुनाया।
मामला 2002 में हुई शादी से जुड़ा है। दंपती के दो बच्चे हैं। शादी के कुछ साल बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा और जुलाई 2011 के बाद वे अलग रहने लगे। पति सेना में कार्यरत था। उसने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर करते हुए पत्नी पर मानसिक क्रूरता के आरोप लगाए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि पत्नी ने पति के चरित्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसकी ही भाभी के साथ अवैध संबंध होने के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, इन आरोपों को लेकर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायतें भी भेजी गई थीं।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि पत्नी की ओर से लगाए गए इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत या गवाह पेश नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति के चरित्र और वैवाहिक निष्ठा पर गंभीर आरोप लगाकर उसकी शिकायत उसके वरिष्ठ अधिकारियों से करना सामान्य घरेलू विवाद की श्रेणी में नहीं आता, खासकर जब आरोप साबित न हों।
अदालत ने यह भी कहा कि सशस्त्र बलों में अनुशासन और पेशेवर प्रतिष्ठा का विशेष महत्व होता है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पति के खिलाफ अनैतिक या अवैध संबंधों के आरोप लगाने से उसकी नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि जब जीवनसाथी की ओर से बार-बार ऐसे आरोप लगाए जाएं, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए पर्याप्त आधार न हो, तो इससे दूसरे पक्ष को मानसिक पीड़ा और अपमान का सामना करना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में पति के खिलाफ लगाए गए चरित्र संबंधी आरोप प्रमाणित नहीं हुए और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने से उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। अदालत ने इसे मानसिक क्रूरता के तौर पर देखा।
पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की मांग करते हुए पत्नी की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों और कथित व्यवहार का भी जिक्र किया था। फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला देते हुए तलाक दिया था। इसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जिसके बाद कोर्ट ने भी तलाक के फैसले को बरकरार रखा।