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August 10, 2026

IGMC में हैरान करने वाला मामला- गर्भ में पल रहे बच्चे के मुंह में मिला दूसरा भ्रू**ण

जन्म से पहले अल्ट्रासाउंड में हुई पहचान

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा एक बेहद असामान्य मामला सामने आया है। चिकित्सकों ने गर्भावस्था के दौरान जांच में ऐसे भ्रूण की पहचान की- जिसके मुंह के अंदर दूसरे भ्रूण जैसी संरचना मौजूद थी।

 गर्भ में पल रहे बच्चे के मुंह में मिला भ्रूण

मेडिकल साइंस में इस स्थिति को फीटस इन फीटू कहा जाता है। इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि असामान्यता का पता बच्चे के जन्म के बाद नहीं- बल्कि गर्भ में रहते हुए इमेजिंग जांच के जरिए चल गया।

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IGMC में हैरान करने वाला मामला

IGMC के विशेषज्ञों ने अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच तकनीकों की सहायता से स्थिति की पहचान की। इस दुर्लभ चिकित्सकीय अनुभव पर तैयार केस रिपोर्ट अब एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित हुई है।

20 वर्षीय गर्भवती...

मामला 20 वर्षीय महिला की गर्भावस्था से जुड़ा है। गर्भावस्था के 22 सप्ताह पूरे होने से पहले की गई सोनोग्राफी के दौरान डॉक्टरों को भ्रूण के जबड़े के क्षेत्र में कुछ असामान्य दिखाई दिया।

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कैसे हुआ खुलासा?

जांच में सिर्फ जबड़े की बनावट में बदलाव ही नजर नहीं आया, बल्कि भ्रूण के मुंह के भीतर एक अलग संरचना भी दिखाई दी। सामान्य स्थिति से अलग इस निष्कर्ष के बाद चिकित्सकों ने मामले को गंभीरता से लिया और अधिक विस्तृत इमेजिंग करवाई। अलग-अलग जांचों के निष्कर्षों को मिलाने पर विशेषज्ञों ने इसे फीटस इन फीटू की दुर्लभ स्थिति के रूप में पहचाना।

क्या होता है फीटस इन फीटू?

फीटस इन फीटू एक अत्यंत दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति है, जो आमतौर पर जुड़वा गर्भावस्था के दौरान विकसित होने वाली असामान्यता से जुड़ी होती है। इसमें विकास की प्रक्रिया के दौरान एक भ्रूण दूसरे भ्रूण के शरीर के भीतर समाहित हो जाता है और स्वयं सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाता।

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मुंह में था भ्रूण

ऐसे मामलों में शरीर के भीतर मौजूद अविकसित भ्रूण की संरचना अक्सर पेट या शरीर के दूसरे हिस्सों में पाई जाती है। हालांकि, IGMC में सामने आए मामले की असामान्यता इसकी जगह को लेकर थी- क्योंकि यहां ऐसी संरचना भ्रूण के मुंह के अंदर दिखाई दी। इसके साथ ही भ्रूण के जबड़े से संबंधित गंभीर विकृति भी जांच में सामने आई।

जन्म से पहले पहचान होना दुर्लभ

विशेषज्ञों के अनुसार फीटस इन फीटू के अधिकांश मामलों की पहचान प्रसव के बाद होती है। गर्भ में रहते हुए नियमित इमेजिंग के माध्यम से इसकी पहचान होना अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है।

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समय रहते चल गया पता

इस मामले में प्रसव से पहले ही अल्ट्रासाउंड जांच ने चिकित्सकों को असामान्यता की ओर संकेत दे दिया। इसके बाद IGMC के स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा रेडियोलॉजी विशेषज्ञों ने मिलकर उपलब्ध इमेजिंग तकनीकों के आधार पर स्थिति का आकलन किया। समय रहते इस असामान्यता की पहचान होने से चिकित्सकों को गर्भस्थ भ्रूण की स्थिति और उससे जुड़े संभावित जोखिमों को समझने में मदद मिली।

भ्रूण में गंभीर विकृतियां भी मिलीं

विस्तृत जांच के दौरान भ्रूण में कई गंभीर असामान्यताएं सामने आईं। चिकित्सकों ने गर्भवती महिला और उसके स्वजन को जांच के निष्कर्षों तथा स्थिति की गंभीरता के बारे में जानकारी दी।

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गर्भवस्था को किया समाप्त

उपलब्ध जानकारी के अनुसार गर्भावस्था 22 सप्ताह से कम थी और भ्रूण में गंभीर विकृतियां मौजूद थीं। इसके बाद चिकित्सकीय सलाह, परामर्श और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप गर्भावस्था समाप्त करने का निर्णय लिया गया। डॉक्टरों के अनुसार असामान्यता का समय रहते पता चलना महत्वपूर्ण था- क्योंकि इससे महिला के स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन और उचित चिकित्सकीय प्रबंधन संभव हो सका।

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