#विविध
September 22, 2026
हिमाचल : लोन गारंटर बनना आसान नहीं, नीलाम हो सकती है संपत्ति- हाईकोर्ट ने साफ किया नियम
बैंक मुख्य कर्जदार से पहले गारंटर से भी रकम वसूल कर सकता है
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शिमला। अगर आपने किसी के बैंक लोन की गारंटी दी है तो सिर्फ यह सोचकर निश्चिंत न हों कि बैंक पहले कर्ज लेने वाले से पैसे मांगेगा। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्ज वसूली से जुड़े एक मामले में साफ कर दिया है कि गारंटर की जिम्मेदारी भी मुख्य कर्जदार के बराबर हो सकती है।
बैंक चाहे तो मुख्य कर्जदार से पहले गारंटर से भी रकम की वसूली कर सकता है। न्यायाधीश रोमेश वर्मा की अदालत ने गारंटरों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति की नीलामी के आदेश को चुनौती दी थी।
मामला कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़ा है। वर्ष 2009 में मेसर्स अखिल स्टील ट्रेडर्स ने बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण लिया था। इस लोन के लिए कुछ लोगों ने बैंक के सामने गारंटी डीड दी थी। जब लोन की रकम वापस नहीं हुई तो बैंक ने वर्ष 2012 में मुख्य कर्जदार और गारंटरों के खिलाफ करीब 10.99 लाख रुपये की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
वरिष्ठ सिविल जज, नादौन ने 26 फरवरी 2019 को बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को 12.50 प्रतिशत ब्याज के साथ रकम चुकाने के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार माना। इस फैसले को किसी ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी गई, इसलिए यह अंतिम हो गया।
इसके बाद बैंक ने बकाया रकम की वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की। निचली अदालत ने 28 मार्च 2026 को गारंटरों की संपत्ति की बिक्री के लिए वारंट जारी कर दिया। इसके खिलाफ गारंटर हाईकोर्ट पहुंच गए। उनकी दलील थी कि मुख्य कर्जदार के पास पर्याप्त संपत्ति है और बैंक को पहले उसी की संपत्ति से अपना पैसा वसूलना चाहिए।
गारंटरों का कहना था कि उनसे वसूली बाद में की जाए। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अगर गारंटी के समझौते में कोई अलग शर्त नहीं है तो गारंटर की जिम्मेदारी मुख्य कर्जदार के समान होती है।
बैंक के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह पहले मुख्य कर्जदार से वसूली के सभी रास्ते आजमाए और उसके बाद ही गारंटर के पास पहुंचे। बैंक अपने विवेक के अनुसार मुख्य कर्जदार या गारंटर, किसी से भी रकम की वसूली शुरू कर सकता है।
अदालत ने इसी आधार पर गारंटरों की याचिका खारिज कर दी। यानी किसी के लोन की गारंटी देना केवल औपचारिकता नहीं है। कर्ज न चुकने की स्थिति में गारंटर की संपत्ति भी वसूली की कार्रवाई के दायरे में आ सकती है।