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September 21, 2026
टैटू से खुला प्रमिला का अपनों तक पहुंचने का रास्ता

मंडी। कभी-कभी जिंदगी इंसान को उसके अपनों से इतनी दूर ले जाती है कि वर्षों तक यह पता ही नहीं चलता कि वह कहां है और किस हाल में है। समय गुजरता रहता है, रिश्तों की यादें धुंधली होती जाती हैं। कुछ लोग तो खोए हुए अपनों की जिंदा होने की उम्मीद तक छोड़ देते हैं। मगर कुछ लोगों के दिलों में कहीं न कहीं उम्मीद बाकी रहती है कि शायद एक दिन बिछड़ा हुआ अपना फिर मिल जाएगा।
ऐसा ही एक मामला मंडी जिले से सामने आया है। जहां करीब 35 वर्षों तक परिवार से दूर रहने के बाद आखिरकार वह दिन आया- जब ओडिशा की रहने वाली प्रमिला अपने परिवार से मिली।
करीब 35 साल तक अपनों से दूर रहने के बाद रविवार को वह भावुक क्षण आया- जब मंडी के भंगरोटू वृद्ध आश्रम में रह रही प्रमिला ने वीडियो कॉल के जरिए अपने परिवार से बातचीत की। मोबाइल स्क्रीन पर परिवार के सदस्यों को देखकर वर्षों से जमा भावनाएं जैसे एक साथ सामने आ गईं।
प्रमिला का संबंध ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले की अलुपुआ पंचायत से बताया जाता है। हालांकि अलग-अलग संस्थागत दस्तावेजों में उनका नाम रामकली मलिक भी दर्ज है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 से 2018 तक उन्होंने शिमला के एक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र में समय बिताया। इसके बाद वह शिमला के नारी निकेतन में रहीं और बाद में उन्हें मंडी के भंगरोटू वृद्ध आश्रम लाया गया।
परिवार से संपर्क टूटने के बाद इतने लंबे समय तक प्रमिला के अतीत की पूरी जानकारी सामने नहीं आ सकी थी। उनकी पुरानी यादें भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं थीं। ऐसे में परिवार की तलाश के दौरान उनसे बातचीत कर छोटे-छोटे संकेत जुटाए गए।
इसी दौरान ओडिशा से जुड़ी उनकी कुछ यादें सामने आईं। प्रमिला ने कटक समेत कुछ स्थानों का उल्लेख किया। उनकी बांह पर बना ओड़िया भाषा का टैटू भी जांच की दिशा तय करने वाला अहम संकेत बना।
प्रमिला को उनके परिवार तक पहुंचाने के लिए 'मिशन अपनों तक' के तहत प्रयास किए गए। बल्ह की SDM समृतिका नेगी और तहसील कल्याण अधिकारी धर्मशीला ने भंगरोटू वृद्ध आश्रम पहुंचकर प्रमिला से बातचीत की। उनकी बातचीत के छोटे वीडियो सबिता चंदा और इंडिया केयर्स के साथ साझा किए गए। इसके बाद ओडिशा में उनकी पहचान तलाशने के लिए पुलिस की मदद ली गई।
सबिता चंदा ने ओडिशा रेलवे पुलिस एवं कोस्टल सिक्योरिटी के ADG अरुण बोथरा से संपर्क किया। अमित कुमार मलिक ने भी सुरागों के सत्यापन में सहयोग किया। प्रणय राउत और राजा मलिक सहित अन्य लोगों ने भी जानकारी जुटाने में भूमिका निभाई। अलग-अलग जगहों से मिली जानकारियों को मिलाने के बाद आखिरकार प्रमिला के परिवार की पहचान हो गई।
रविवार को वीडियो कॉल के दौरान जब प्रमिला के सामने उनके परिवार के लोग आए तो 35 वर्षों की दूरी मानो कुछ पलों के लिए थम गई। परिवार के सदस्यों के लिए यह लंबे इंतजार के बाद अपनों को सामने देखने का अवसर था। प्रमिला के लिए भी यह अपने अतीत, पहचान और रिश्तों से दोबारा जुड़ने का बेहद खास पल रहा। एक मोबाइल स्क्रीन के जरिए वर्षों से टूटा संपर्क फिर कायम हुआ और बिछड़े परिवार के लिए नई उम्मीद की शुरुआत हुई।