कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर लगातार जारी है। अब इसकी चपेट में कुल्लू जिला का गड़सा घाटी क्षेत्र आया है- जहां आज दोपहर को बादल फटने की घटना ने प्रकृति के रौद्र रूप का अहसास करवाया।
कुल्लू में फटा बादल
भारी वर्षा और अचानक आई बाढ़ ने क्षेत्र में तबाही मचा दी। गड़सा के कई गांवों में खेतों, पैदल रास्तों और घरों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों के सिर पर मौत का साया मंडरा रहा है।
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लोगों मच गया हड़कंप
जानकारी के अनुसार, आज दोपहर करीब 2 बजे तेज गर्जना और बारिश के साथ अचानक गड़सा घाटी के ऊपरी हिस्से में बादल फटा। तेज बहाव के साथ पानी और मलबा खेतों, बाग-बगीचों और रास्तों में घुस गया। कई स्थानों पर नालों ने रौद्र रूप ले लिया, जिससे आसपास की सड़कें और पुलिया क्षतिग्रस्त हो गईं।
खेती-बाड़ी को भारी नुकसान
ग्रामीणों ने बताया कि भारी बारिश और मलबे के कारण सेब के बागान, मटर और अन्य मौसमी फसलें बर्बाद हो गई हैं। कई खेतों में मलबा भर गया है, जिससे आने वाले महीनों में बोवाई भी प्रभावित हो सकती है। कई ग्रामीण परिवारों के लिए यह घटना आर्थिक झटका बन गई है, क्योंकि खेती और बागवानी ही उनकी मुख्य आय का स्रोत है।
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कई रास्ते हुए बंद, स्कूली बच्चों को परेशानी
गड़सा घाटी के कई संपर्क मार्गों पर मलबा और पत्थर गिरने से रास्ते अवरुद्ध हो गए हैं। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। बादल फटने की आवाज और तेज बहाव ने गांवों में अफरा-तफरी मचा दी है।कई लोग ऊंचे स्थानों पर शरण लेकर गुजारने पर मजबूर हो गए हैं।
हिमाचल में दो जगह फटा बादल
आपको बता दें कि प्रदेश एक बार फिर भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं से थर्रा उठा है। हिमाचल में कल रात और आज सुबह पहले ही दो जिलों में बादल फटने की घटना सामने आई है। बादल फटने से कई घर और जमीनें मलबे में बह गई हैं। चंबा जिले के चुराह क्षेत्र में भी रविवार सुबह बादल फटने की घटना हुई, जिससे कंघेला नाले में बाढ़ आ गई और नवनिर्मित पुल बह गया। यह पुल पहले भी वर्ष 2022 की बाढ़ में बह चुका था।
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नाले में आया मलबे का सैलाब
वहीं, शनिवार रात करीब ढाई बजे मंडी जिले की चौहारघाटी की सिल्हबुधानी पंचायत के कोरतंग नाले में बादल फटने से बाढ़ आ गई। गनीमत यह रही कि इस बार किसी प्रकार की जानी नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन इलाके में दहशत का माहौल है।
नहीं थम रहा तबाही का दौर
चंबा के कंघेला नाले पर बना यह पुल चार पंचायतों को मुख्य सड़क से जोड़ता था। पुल बहने से पूरे क्षेत्र का संपर्क शेष दुनिया से पूरी तरह कट गया है। राहत की बात यह है कि यहां भी किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन लोगों की आवाजाही और आपात सेवाएं पूरी तरह बाधित हो चुकी हैं।
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10 जिलों में बारिश का अलर्ट
हिमाचल के कई हिस्सों में बीती रात से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, चंबा, शिमला, सोलन और कुल्लू जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
सुरक्षित स्थानों पर रहें लोग
लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी जिलों में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। मौसम वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने चेताया है कि आज दोपहर बाद और देर रात एक बार फिर तेज बारिश की एक और स्पेल आ सकती है।
तेज बारिश बसाएगी आफत
मौसम विभाग के अनुसार, 9 जुलाई को वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर पड़ेगा, ऐसे में राज्य के सभी जिलों में यलो अलर्ट रहेगा। हालांकि, इससे पहले 8 जुलाई को ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा में फिर से भारी बारिश की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट) दी गई है।
अब तक 75 लोगों की मौत, 37 लापता
20 जून से अब तक 37 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है। इस मानसून सीजन में राज्य भर में 75 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें-
- 14 की जान बादल फटने से
- 8 की फ्लैश फ्लड में
- 1 की लैंडस्लाइड से
- 8 लोग पानी में डूब गए
- 4 की मौत बिजली करंट लगने से
- 3 की सर्पदंश से
- 1 की आग से
- 6 की ऊंचाई से गिरकर
- 3 की अन्य कारण
27 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है।
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15 जगह फटा बादल
मंडी जिले में बीते दिनों आए प्राकृतिक कहर ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। अकेले 30 जून की रात को मंडी की सराज, नाचन, धर्मपुर और करसोग विधानसभाओं में 15 जगह बादल फटने की घटनाएं हुईं। सराज विधानसभा में ही 10 से ज्यादा स्थानों पर बादल फटे, जिससे करीब 20,000 की आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
कई लोग हुए बेघर
सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा है, सेब के बाग उजड़ गए हैं, मवेशी बह गए हैं और कई परिवार बेघर हो गए हैं। मंडी में अब तक 14 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 32 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान में भारतीय सेना भी सक्रिय रूप से जुटी हुई है। सेना न केवल लोगों की तलाश कर रही है, बल्कि उन इलाकों में राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं भी पहुंचा रही है, जहां सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं।
