चंबा/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम और कटे हुए क्षेत्रों में शुमार कांगड़ा जिला के बड़ा भंगाल से मानवता और अदम्य साहस की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर हर कोई इन जांबाजों के जज्बे को सैल्यूट कर रहा है। बड़ा भंगाल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे एक बीमार शख्स के लिए 13 लोगों की एक टीम संकटमोचक और साक्षात देवदूत बनकर सामने आई। इस जांबाज टीम ने विपरीत परिस्थितियों और कुदरत की बंदिशों को बौना साबित करते हुए पहाड़ों पर अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक रेस्क्यू अभियान पूरा किया।
जब हेलिकॉप्टर ने टेके घुटने, तब सामने आए 13 देवदूत
जानकारी के अनुसार बड़ा भंगाल में एक व्यक्ति की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई थी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) कांगड़ा और उपायुक्त कांगड़ा ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भरमौर प्रशासन से संपर्क साधा। मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत एयरलिफ्ट करने की जरूरत थी। लेकिन मौसम ने ऐसा क्रूर रुख अख्तियार किया कि आसमान में धुंध और खराब विजिबिलिटी के चलते हेलिकॉप्टर उड़ान ही नहीं भर सका।
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जब हेलिकॉप्टर सेवा ने हाथ खड़े कर दिए, तो प्रशासन ने जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाला। एडीएम भरमौर विकास शर्मा के निर्देश पर पर्वतारोहण अनुदेशक पंकज महंत की अगुवाई में 13 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम का गठन किया गया। यही वो 13 जांबाज थे, जिन्होंने तय किया कि वे मौत को इस इंसान पर हावी नहीं होने देंगे।
खड़े पहाड़, तीखी ढलान और स्ट्रेचर पर 2 दिन का सफर
यह रेस्क्यू अभियान किसी खौफनाक थ्रिलर से कम नहीं था। 13 देवदूतों की यह टीम 18 जुलाई को भरमौर से बड़ा भंगाल के लिए रवाना हुई। रास्ते में न तो कोई पक्की सड़क थी और न ही चलने का कोई सुगम जरिया। सिर्फ थे खड़े पहाड़, जानलेवा तीखी ढलानें और हर पल गिरता हुआ तापमान। इन जांबाज बेटों ने बिना रुके रात के अंधेरे में भी ट्रैकिंग जारी रखी और उसी रात तड़पते हुए मरीज के पास पहुंच गए।
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अगली सुबह यानी 19 जुलाई को असली इम्तिहान शुरू हुआ। टीम ने मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाया और अपने कंधों पर उठाकर पैदल ही वापस सफर शुरू कर दिया। खराब मौसम की मार, मूसलाधार बारिश का खतरा और संकरे रास्तों के बीच स्ट्रेचर का संतुलन बनाए रखना एक अकल्पनीय चुनौती थी। खड़े पहाड़ों की तीखी ढलानों से गुजरते हुए, लगातार पैदल सफर तय कर यह टीम आखिरकार रात के 11 बजे मरीज को सुरक्षित धराड़ी (सड़क मार्ग) तक पहुंचाने में कामयाब रही।
चंबा मेडिकल कॉलेज में जारी है इलाज, जज्बे को सलाम
धराड़ी में प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए पहले से ही एंबुलेंस तैनात कर रखी थी। सड़क मार्ग पर पहुंचते ही मरीज को तुरंत पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, चंबा पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है और अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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भरमौर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला चंबा के बेहतरीन तालमेल, और सबसे बढ़कर पंकज महंत व उनकी 13 सदस्यीय टीम के अदम्य साहस, धैर्य और सूझबूझ के कारण आज एक अनमोल जिंदगी बच सकी है। विपरीत हालात में निभाया गया यह फर्ज सदियों तक याद रखा जाएगा।
