शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती चुनावों में सामने आई निर्णयों ने लोगों को कई जगह पर चौंका दिया। जिस प्रत्याशी के जीतने की लोगों को भारी उम्मीद थी, वो नहीं जीत पाए और जहां किसी को उम्र और अनुभव में छोटा माना जा रहा था, उसी प्रत्याशी ने जीत का परचम लहरा दिया। कुछ ऐसा ही देखने को मिला है शिमला जिले के रामपुर विधानसभा से आते नरैण वॉर्ड में, जहां ऐसा परिणाम आया कि पारंपरिक राजनीति के समीकरण ही बदल दिए हैं। यहां विक्रमादित्य के गृहक्षेत्र रामपुर में कांग्रेस का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा है और आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे रोनी ने जीत दर्ज कर ली है। 

महज 24 वर्ष में जिला परिषद सदस्य बनें रोनी

महज 24 वर्षीय निर्दलीय उम्मीदवार रोनी ने भाजपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत ने न केवल युवा नेतृत्व की ताकत को साबित किया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि मतदाता अब बड़े राजनीतिक नामों से ज्यादा नए चेहरों और स्थानीय जुड़ाव को महत्व दे रहे हैं।

नरैण वार्ड में युवा चेहरे पर जनता ने जताया भरोसा

जिला परिषद शिमला के वार्ड नंबर-3 नरैण में हुए चुनाव को शुरू से ही बेहद दिलचस्प माना जा रहा था। मुकाबला भाजपा समर्थित शिव राम, कांग्रेस समर्थित सुदेश और निर्दलीय उम्मीदवार रोनी के बीच था। लेकिन जब परिणाम सामने आए तो सबसे आगे रोनी नजर आए।

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आधिकारिक नतीजों के अनुसार रोनी को 6457 वोट प्राप्त हुए। वहीं भाजपा समर्थित शिव राम को 4543 मत मिले। इस तरह रोनी ने 1914 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर सभी राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया।

कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसकी

इस सीट पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सुदेश को भी बड़ा झटका लगा। चुनाव को त्रिकोणीय बनाने का दावा करने वाले सुदेश केवल 2779 वोट हासिल कर सके और तीसरे स्थान पर रहे। अन्य उम्मीदवार भी चुनाव में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए बड़ा संदेश है।

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ABVP से राजनीति की शुरुआत

रोनी राणा पहले से छात्र राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उनका संबंध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से रहा है। चुनाव से पहले उन्हें भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया।

 

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युवा उम्मीदवार के रूप में उन्होंने घर-घर जाकर प्रचार किया और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। जनता ने भी उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें बड़ी जीत दिलाई।

युवाओं की राजनीति का नया चेहरा बने रोनी

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह जीत केवल एक जिला परिषद सीट की जीत नहीं है, बल्कि हिमाचल की ग्रामीण राजनीति में उभरते युवा नेतृत्व का संकेत भी है। 24 वर्ष की उम्र में जिला परिषद पहुंचने वाले रोनी अब क्षेत्र के सबसे चर्चित युवा नेताओं में शामिल हो गए हैं।

नरैण वार्ड का परिणाम यह भी बताता है कि यदि उम्मीदवार जनता के बीच मजबूत पकड़ रखता हो तो राजनीतिक दलों का समर्थन ही जीत का एकमात्र आधार नहीं होता।

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