देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सुक्खू सरकार अब पूरी तरह सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। नशा माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब केवल तस्करों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों में बैठे उन कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है जो सरकारी पद का लाभ उठाकर नशे के अवैध कारोबार में शामिल पाए जा रहे हैं। ऐसे ही सरकारी विभाग में बैठे सात कर्मचारियों पर सुक्खू सरकार ने बड़ी कार्रवाई कर दी है। बड़ी बात यह है कि इनमें एक महिला कर्मचारी भी शामिल है।
सरकारी विभागों में बैठे नशा कारोबारी रडार पर
दरअसल प्रदेश में लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अब नशा तस्करी में संलिप्त सरकारी कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस जांच में जिन कर्मचारियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके संबंधित विभागों को सूचित किया जा रहा है और नियमों के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
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सात सरकारी कर्मचारियों पर गिरी गाज
इसी अभियान के तहत कांगड़ा जिले के पुलिस जिला देहरा में नशा निरोधक कानून से जुड़े मामलों में संलिप्त पाए गए सात सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। संबंधित विभागों ने इन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी महकमों में भी हलचल मच गई है।
महिला कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में
नशा तस्करी के खिलाफ चल रही इस मुहिम में स्वास्थ्य विभाग की एक महिला कर्मचारी पर भी गाज गिरी है। महिला कर्मचारी के खिलाफ नशा निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए महिला कर्मचारी को सेवा से निलंबित कर दिया।
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कई विभागों के कर्मचारी शामिल
जानकारी के अनुसार अब तक जिन सात कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें पशुपालन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, हिमाचल पथ परिवहन निगम तथा मंदिर न्यास से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस द्वारा विभागाध्यक्षों को जानकारी दिए जाने के बाद सभी संबंधित विभागों ने अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
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नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो, अर्ध-सरकारी संस्थान से जुड़ा हो या किसी निजी संस्था में कार्यरत हो, कानून सभी के लिए समान रहेगा। विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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सरकारी तंत्र को साफ करने की दिशा में बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ हुई यह कार्रवाई केवल अनुशासनात्मक कदम नहीं, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र को एक कड़ा संदेश है। सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि जनता की सेवा के लिए नियुक्त कर्मचारियों का किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल होना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
