#विविध
May 20, 2026
हिमाचल पंचायत चुनाव : धर्म संकट में फंसा पति, वॉर्ड पंच के लिए पत्नी और सगी बहन आमने-सामने
दुविधा में माता-पिता, किसका करें समर्थन
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे चुनावी मैदान से नए-नए दिलचस्प किस्से सामने आने लगे हैं। कहीं पति-पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं तो कहीं पिता और पुत्र अलग-अलग दावेदारी पेश कर रहे हैं।
इसी बीच सराज विधानसभा क्षेत्र की केओली पंचायत में इस बार चुनाव ने रिश्तों को ही राजनीतिक रंग दे दिया है। यहां वार्ड सदस्य के चुनाव को लेकर ननद और भाभी आमने-सामने उतर आई हैं।
एक ही परिवार में शुरू हुई यह चुनावी प्रतिस्पर्धा अब पूरे गांव में चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है। गांव की चौपालों से लेकर घरों के आंगन तक हर तरफ इसी मुकाबले की बातें हो रही हैं।
एक तरफ बीना देवी चुनाव मैदान में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए महिलाओं और युवाओं से लगातार संपर्क साध रही हैं। वहीं दूसरी ओर उनकी भाभी खीरामणी भी घर-घर जाकर समर्थन जुटाने में लगी हुई हैं।
दोनों उम्मीदवारों के समर्थक अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं, जिससे चुनावी सरगर्मी और बढ़ गई है। इस मुकाबले में सबसे अधिक असमंजस की स्थिति गुलशन के सामने खड़ी हो गई है।
एक ओर उनकी पत्नी खीरामणी हैं, जिनके साथ उन्होंने जीवन बिताना है, तो दूसरी ओर उनकी सगी बहन बीना देवी हैं। यही वजह है कि परिवार के सदस्य भी खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं।
गुलशन के पिता लाल मन और माता लीला देवी भी गहरी दुविधा में दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि बेटी और बहू दोनों ही परिवार का हिस्सा हैं, ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
गांव के लोग भी इस चुनाव को लेकर चुटकी लेने से पीछे नहीं हट रहे। कई लोग मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि पंचायत चुनाव ने एक ही घर को दो राजनीतिक खेमों में बांट दिया है। रिश्तेदार भी खुलकर किसी एक उम्मीदवार के समर्थन में आने से बचते नजर आ रहे हैं ताकि परिवारिक रिश्तों में खटास न आए।
चुनावी माहौल इतना गर्म हो चुका है कि सुबह और शाम दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों की भीड़ घर के बाहर देखी जा रही है। खास बात यह है कि महिलाओं में भी इस चुनावी मुकाबले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
अब सबकी नजर मतदान और नतीजों पर टिकी हुई है। गांव में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि इस पारिवारिक चुनावी रण में जीत आखिर ननद की होगी या भाभी की।