#अपराध
August 18, 2026
हिमाचल: 10 लाख रिश्वत लेकर भी कानूनगो ने नहीं की जमीन की निशानदेही ! अधिकारी सहित 4 पर FIR
कोर्ट ने भी नहीं दी आरोपियों को राहत, खारिज की जमानत याचिका
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नाहन। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़े लगातर गहराती जा रही हैं। काम करवाने के बदले मोटी रकम मांगना अब आम बात होने लगी है। राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में जमीन की निशानदेही, इंतकाल और अन्य राजस्व कार्यों को लेकर अकसर इस तरह की शिकायतें सामने आती रहती हैं। अब ऐसा ही एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के धौलाकुआं क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक जमीनी विवाद को सुलझाने और उसकी निशानदेही करवाने के नाम पर एक कानूनगो ने पीड़ित से ₹10 लाख की मोटी रकम (रिश्वत ) ऐंठ ली। इतना ही नहीं, इतनी बड़ी रिश्वत लेने के बाद भी कानूनगो ने न तो जमीन की निशानदेही की और न ही विवाद सुलझाया।
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार रफीक मोहम्मद ने धौलाकुआं क्षेत्र में करीब 11 बीघा जमीन खरीदी थी। जमीन की निशानदेही करवाने के लिए उसने राजस्व विभाग में आवेदन किया। आरोप है कि इस दौरान संबंधित कानूनगो परमजीत सिंह ने उसे बताया कि जमीन से संबंधित मामला पहले से अदालत में चल रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बाद कथित तौर पर उसे भरोसा दिलाया गया कि मामले को सुलझाने और निशानदेही का काम करवाने में मदद की जाएगी।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि निशानदेही और जमीन से जुड़े विवाद को निपटाने के लिए उससे कुल 10 लाख रुपये की मांग की गई। आरोप के मुताबिक रकम देने के लिए उसे दो अलग-अलग मौकों पर भुगतान करना पड़ा। 26 जनवरी को रफीक अपने चालक के साथ कानूनगो के घर पहुंचा, जहां तीन अन्य व्यक्ति भी मौजूद थे। यहां बातचीत के बाद कथित तौर पर 1.50 लाख रुपये नकद दिए गए।
शिकायत के अनुसार पहली रकम देने के दो दिन बाद 28 जनवरी को शेष 8.50 लाख रुपये भी अन्य आरोपियों को सौंप दिए गए। इस तरह शिकायतकर्ता के मुताबिक कुल 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि इतनी बड़ी रकम लेने के बावजूद जमीन की निशानदेही नहीं की गई और न ही विवाद को सुलझाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई हुई।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि जब काफी समय बीतने के बाद भी उसका काम नहीं हुआ तो उसने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि इसके बाद उसे कथित तौर पर डराया-धमकाया जाने लगा। पीड़ित ने पुलिस को यह भी बताया कि उसके पास पैसे के लेन-देन और पूरे घटनाक्रम से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसे उसने मामले में साक्ष्य के तौर पर पुलिस को उपलब्ध करवाया है।
शिकायत के आधार पर माजरा पुलिस ने कानूनगो परमजीत सिंह के अलावा कुलदीप, रविंद्र और धीरज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब कथित लेन-देन, वीडियो रिकॉर्डिंग और आरोपियों के बीच आपसी संबंधों समेत जमीन से जुड़े वास्तविक विवाद की भी जांच कर रही है।
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मामले में चारों आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब पुलिस की जांच और संभावित गिरफ्तारी को लेकर मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
सिरमौर के पुलिस अधीक्षक एनएस नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, रकम का लेन-देन किस तरह हुआ, वीडियो साक्ष्य की वास्तविकता क्या है और जमीन से संबंधित न्यायालयी विवाद की वास्तविक स्थिति क्या है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो कथित तौर पर 10 लाख रुपये लेने के बाद भी जमीन की निशानदेही क्यों नहीं की गई। फिलहाल पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका रही। हालांकि मामले ने एक बार फिर राजस्व संबंधी कार्यों में पारदर्शिता और आम लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।