#अपराध
August 17, 2026
भगवान के घर कमीशनखोरी: ज्वालामुखी मंदिर में रिश्वत मांगने वाले SDO पर गिरी गाज; किया सस्पेंड
मंदिर की साज सजावट और व्यवस्थाओं के लिए ठेकेदार से मांगी थी कमीशन
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें इस कदर गहरी होती जा रही हैं कि कुछ बेखौफ अधिकारी अब भगवान के दर को भी अपनी काली कमाई का जरिया बनाने से नहीं हिचक रहे। आस्था और श्रद्धा के केंद्रों पर भी रिश्वतखोरी का यह खेल बिना किसी डर के जारी है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला प्रदेश के कांगड़ा जिले से सामने आया है, जहां ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में तैनात एक अधिकारी को मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े कामों के लिए ठेकेदार से कमीशन मांगना भारी पड़ गया। आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।
मामले में निलंबित अधिकारी की पहचान SDO शमशेर सिंह के रूप में हुई है। बताया गया है कि शमशेर सिंह ज्वालामुखी में डेपुटेशन पर तैनात थे। उनके खिलाफ आरोप लगाया गया कि ज्वालामुखी मंदिर में टेंट, फूल और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित कार्य करवाने के बदले ठेकेदारों से रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करवाई।
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एसडीएम ज्वालामुखी डॉ. संजीव शर्मा के अनुसार इस मामले में एक पीड़ित व्यक्ति ने उनके समक्ष लिखित शिकायत की थी। शिकायत में संबंधित अधिकारी पर मंदिर में होने वाले विभिन्न व्यवस्थागत कार्यों के लिए ठेकेदारों से रिश्वत अथवा कमीशन मांगने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच करवाई गई। शिकायतकर्ता ने जांच के दौरान कथित लेन-देन से संबंधित UPI ट्रांजेक्शन भी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए।
प्रशासन के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध करवाए गए डिजिटल लेन-देन के साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया। मामले में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ज्वालामुखी ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश जिलाधीश कांगड़ा को भेजी।
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मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए जिलाधीश कांगड़ा हेमराज बैरवा ने SDO शमशेर सिंह को निलंबित कर दिया है। अधिकारी के निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर भी आगामी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन की ओर से मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
हालांकि, अधिकारी पर लगाए गए कमीशन मांगने के आरोपों को लेकर अंतिम स्थिति विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रशासन ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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आस्था के धाम में भ्रष्टाचार के इस मामले ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है और लोग अब ऐसे अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ज्वालामुखी में सामने आए इस मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है कि क्या धार्मिक स्थलों से जुड़े सरकारी कार्यों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत है। फिलहाल प्रशासन की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं और विभागीय कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।