शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के पावन मंदिर से एक ऐसा घिनौना मामला सामने आया था, जिसने गुरु.शिष्या के पवित्र रिश्ते को इस कद्र तार-तार कर दिया कि सुनने वालों की रूह कांप गई। दरअसल सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने शिक्षा के इस मंदिर को अपनी हवस का अखाड़ा बना डाला। इस दरिंदे शिक्षक ने अपने ही स्कूल की एक दो नहीं बल्कि 12 छात्राओं के साथ घिनौनी हरकत कर डाली।  

 

जैसे ही मामले का खुलासा हुआ तो पूरे क्षेत्र ही नहीं बल्कि प्रदेश में हड़कंप मच गया। अब इस पूरे प्रकरण में रामपुर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो कोर्ट) ने त्वरित न्याय की मिसाल पेश करते हुए दोषी शिक्षक को उसके पापों की बड़ी और ऐतिहासिक सजा सुनाई है। मामला शिमला जिला के रामपुर क्षेत्र का है। 

स्कूल में बच्चों के भरोसे को पहुंची गहरी ठेस

मामला रामपुर क्षेत्र के एक विद्यालय से जुड़ा है, जहां कला शिक्षक के पद पर तैनात 46 वर्षीय रविकांत पर नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगे थे। आरोपों के अनुसार शिक्षक ने विद्यालय में पढ़ने वाली कई छात्राओं के साथ अलग.अलग समय पर अभद्र और अशोभनीय हरकतें कीं। आरोपी शिक्षक मूल रूप से मध्य प्रदेश के जिला बालाघाट के वारासिवनी का निवासी है। 

 

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घटनाओं से परेशान छात्राएं लंबे समय तक डर और संकोच के कारण चुप रहीं, लेकिन जब मामला लगातार बढ़ता गया तो उन्होंने साहस दिखाते हुए अपनी पीड़ा स्कूल की काउंसलर के सामने रखी। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और प्रशासन हरकत में आया।

12 छात्राओं की शिकायतों से मचा हड़कंप

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी के खिलाफ केवल एक या दो छात्राओं ने नहीं, बल्कि कुल 12 छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतों के बाद स्कूल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को सूचित किया। मामला सामने आते ही अभिभावकों और आम लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने सवाल उठाए कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बने संस्थानों में इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।

 

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25 गवाहों के बयानों पर मिली सजा

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामला दर्ज कर आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद शुरू हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य और गवाह पेश किए। सुनवाई के दौरान 25 गवाहों के बयान दर्ज किए गएए जिन्होंने मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य अदालत के सामने रखे। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं।

 

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अदालत ने सुनाया सख्त फैसला

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो कोर्ट) ने आरोपी शिक्षक को विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत दोषी ठहराते हुए कुल 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी को दी गई अलग-अलग सजाएं क्रमिक रूप से चलेंगी, जिसके चलते उसे कुल 10 वर्ष जेल में बिताने होंगे।

फैसले से गया कड़ा संदेश

इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह निर्णय उन लोगों के लिए सख्त संदेश है जो बच्चों के विश्वास और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं।

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बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं

यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं बल्कि बच्चों के विश्वास, सुरक्षा और व्यक्तित्व निर्माण की नींव होते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता या अपराध को कानून बेहद गंभीरता से देखता है। अदालत के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं है और ऐसे मामलों में दोषियों को कड़ी सजा देकर न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

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