#अपराध
July 14, 2026
हिमाचल : कलयुगी मां ने किया अपनी ही बेटी का सौदा, करवाया देह व्यापार- अब मिली सजा
क्लबों में डांस करवाया जाता था, अलग-अलग होटलों में ग्राहकों के पास भेजा जाता था
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कुल्लू। जिस मां को अपनी बेटी की सबसे बड़ी ढाल होना चाहिए था, उसी ने उसे पैसों के लालच में अपराध की दुनिया में धकेल दिया। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सामने आए इस सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।
मानव तस्करी, नाबालिग से दुष्कर्म और जबरन देह व्यापार कराने के मामले में पीड़िता की मां समेत तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला 29 अप्रैल 2018 को सामने आया था। 'कंसुलर चाइल्ड हेल्प लाइन मनाली' की टीम एक नाबालिग बच्ची को लेकर पुलिस थाना मनाली पहुंची थी। शिकायत में बताया गया कि बच्ची और कुछ अन्य लड़कियों को धमकाकर देह व्यापार में धकेला जा रहा था। उनसे क्लबों में डांस करवाया जाता था और बाद में अलग-अलग होटलों में ग्राहकों के पास भेजा जाता था।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पीड़ित बच्ची की अपनी मां ही इस पूरे मामले में शामिल थी। आरोप था कि उसने अपनी बेटी को पैसों के बदले इस धंधे में धकेल दिया था। अदालत में पेश साक्ष्यों के अनुसार, मुख्य आरोपी शिव शंकर उर्फ सिकंदर ने बच्ची की मां को हर महीने 40 हजार रुपये देने का वादा किया था। इसके बाद बच्ची का शोषण शुरू हुआ।
विशेष न्यायाधीश (सत्र न्यायाधीश) कुल्लू प्रकाश चंद राणा की अदालत ने यूपी के बरेली निवासी शिव शंकर उर्फ सिकंदर, हरियाणा के करनाल निवासी नितिन जैन उर्फ मन्नू और पीड़िता की मां को दोषी करार दिया।
अदालत ने तीनों को मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार, पॉक्सो अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं के तहत अलग-अलग मामलों में 10-10 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त जेल की सजा भी भुगतनी होगी।
जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम ने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई।
इस फैसले को मानव तस्करी और बच्चों के यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पीड़ित का अपना परिवार ही क्यों न हो।