शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में नशे का बढ़ता जाल अब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक त्रासदी का रूप ले चुका है। ऊना जिले के हरोली क्षेत्र से सामने आई एक कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि नशे का कारोबार आखिर किस तरह पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।
पिता बेचता था नशा
सीमावर्ती क्षेत्र का एक व्यक्ति करीब तीन दशक तक अफीम, भुक्की और चूरा-पोस्त जैसे नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़ा रहा। इस दौरान उसने अपना परिवार भी बसाया और उसके दो बेटे हुए। मगर जिस माहौल में बच्चे बड़े हुए, वहां नशा एक सामान्य चीज बन चुका था। पिता को नशा बेचते और स्वयं उसका सेवन करते देखकर दोनों बेटे भी धीरे-धीरे उसी राह पर चल पड़े।
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एक बेटे की मौत, दूसरा आज भी गलत रास्ते पर
समय बीतने के साथ दोनों बेटे चिट्टे की गिरफ्त में आ गए। नशे की बढ़ती लत ने परिवार की खुशियां छीन लीं। एक बेटे की हालत इतनी खराब हो गई कि उसकी मौत हो गई। उसका शव एक सुनसान स्थान से बरामद किया गया था। जांच में यह बात सामने आई कि उसकी जान नशे की ओवरडोज के कारण गई थी।
पुलिस कार्रवाई से नहीं बचा पिता
परिवार को इस सदमे से उबरने का मौका भी नहीं मिला। दूसरा बेटा भी कथित रूप से नशे के अवैध कारोबार से जुड़ा बताया जाता है। दूसरी ओर पिता भी पुलिस कार्रवाई से नहीं बच पाया।
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हरोली पुलिस ने उसे मकोड़गढ़ क्षेत्र में नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया था। हालांकि, अब दावा किया जा रहा है कि उसने तस्करी छोड़ दी है, लेकिन वर्षों पुरानी लत अभी भी उसका पीछा नहीं छोड़ रही।
ओवरडोज से लगातार जा रही युवाओं की जान
हरोली क्षेत्र में नशे का असर लगातार गहराता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में चार युवाओं की ओवरडोज के कारण मौत हो चुकी है। हीरां थड़ा, बीटन और गोंदपुर बुल्लां जैसे क्षेत्रों में नशे की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवाओं को इस दलदल से बचाने के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर काम करना होगा।
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नौकरी मिली, लेकिन नशे ने छीन लिया सब कुछ
अंब उपमंडल के एक अन्य परिवार की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। यहां एक युवक अच्छी शिक्षा हासिल कर सरकारी नौकरी तक पहुंचा, लेकिन नशे की लत ने उसके जीवन की दिशा ही बदल दी।
नशे की चपेट में आया होनहार
युवक प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखता है। उसके पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए थे, जबकि छोटा भाई आज भी सेना में देश की सेवा कर रहा है। तकनीकी शिक्षा के लिए बाहरी राज्य जाने के दौरान वह नशे की चपेट में आ गया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे विद्युत बोर्ड में नौकरी मिल गई, लेकिन तब तक नशे की लत गहरी हो चुकी थी।
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लत पूरी करने के लिए करने लगा चोरी
बताया जाता है कि नशे की जरूरतें पूरी करने के लिए युवक ने गलत रास्ता अपनाना शुरू कर दिया। वह विभागीय सामान की चोरी करने लगा और कई बार पकड़ा भी गया। परिवार को उम्मीद थी कि विवाह के बाद उसकी जिंदगी पटरी पर लौट आएगी।
पत्नी ने भी छोड़ा साथ
परिजनों ने उसका विवाह कराया, लेकिन पत्नी को जब पति की नशे की लत और व्यवहार का पता चला तो रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगीं। आखिरकार स्थिति ऐसी बनी कि दोनों का वैवाहिक संबंध टूट गया और तलाक हो गया।
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बेटे की हालत ने तोड़ दिया पिता का हौसला
परिवार के लिए यह घटनाएं किसी बड़े आघात से कम नहीं थीं। बेटे की बिगड़ती जिंदगी, नौकरी पर संकट, वैवाहिक जीवन का टूटना और समाज में बढ़ती चर्चा ने पिता को भीतर तक झकझोर दिया।
नशा डाल रहा गहरा असर
परिजनों का कहना है कि लगातार तनाव और मानसिक पीड़ा ने उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला। आखिरकार इसी चिंता और सदमे के बीच उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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समाज के लिए चेतावनी हैं ये कहानियां
ऊना जिले के इन दोनों परिवारों की कहानियां केवल व्यक्तिगत घटनाएं नहीं हैं, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। नशा केवल एक व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि पूरे परिवार की खुशियां, रिश्ते, सम्मान और भविष्य को निगल जाता है।
