#राजनीति
June 20, 2026
हिमाचल में भाजपा से हो गया 'खेला', शपथ से पहले इस MC के 11 पार्षदों पर केस दर्ज; थाने में बुलाए
मुख्यमंत्री का पुतला जलाने पर 11 भाजपा पार्षदों सहित 20 लोगों पर मामला दर्ज
शेयर करें:

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले धर्मशाला में भाजपा के साथ एक बड़ा सियासी खेला हो गया है। नगर निगम धर्मशाला के चुनावों में भाजपा ने बंपर जीत दर्ज की थी। यहां भाजपा के 11 पार्षदों ने जीत दर्ज कर धर्मशाला नगर निगम को भाजपा की झोली में डाल दिया। लेकिन अभी नवनिर्वाचित पार्षदों की कुर्सी का सस्पेंस खत्म भी नहीं हुआ था कि वे कानूनी चक्रव्यूह में फंस गए हैं।
शपथ ग्रहण समारोह की तारीख (29 जून) आने से पहले ही धर्मशाला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भाजपा समर्थित सभी 11 नवनिर्वाचित पार्षदों सहित करीब 15 से 20 नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इस सियासी उलटफेर के बाद अब शपथ लेने से पहले पुलिस थाने में हाजिरी लगानी पड़ रही है] जिसने धौलाधार की वादियों में राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: DIG संजीव गांधी से वसूले जाएंगे 1.80 लाख रुपए, आवास खाली ना करने पर लगाया डैमेज चार्ज
नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को बहुमत मिलने के बाद नवनिर्वाचित पार्षद शपथ ग्रहण का इंतजार कर रहे थे। लेकिन परिणाम घोषित होने के कई दिनों बाद भी शपथ ग्रहण नहीं होने से नाराज पार्षदों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश सरकार और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इसी विरोध प्रदर्शन ने अब कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और नगर निगम आयुक्त का पुतला जलाने के प्रयास को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। अब पुलिस की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआती कार्रवाई के बाद पुलिस ने नवनिर्वाचित पार्षदों सहित 15 से 20 लोगों को जांच के दायरे में ले लिया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस आने वाले दिनों में और लोगों की भूमिका की भी जांच कर सकती है। मामले से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: मनीषा मित्तल ह*त्याकांड का सामने आया लाइव VIDEO, बेहद पास से मारी थी गो*लियां; देखें
मामले की जांच के तहत धर्मशाला पुलिस लगातार भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और नवनिर्वाचित पार्षदों को पूछताछ के लिए बुला रही है। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कई पार्षदों और पार्टी पदाधिकारियों से पुलिस ने पूछताछ भी की है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि नगर निगम की नई कार्यप्रणाली शुरू होने से पहले ही विवादों ने दस्तक दे दी है।
भाजपा समर्थित पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के बावजूद शपथ ग्रहण में अनावश्यक देरी की गई। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है, लेकिन शपथ ग्रहण न होने के कारण वे अपने वार्डों की समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि प्रदेश सरकार जानबूझकर प्रशासनिक प्रक्रिया को लंबा खींच रही है, ताकि नगर निगम में नई व्यवस्था लागू होने में देरी हो सके।
यह भी पढ़ें : CM सुक्खू ने दी पंचायत चौकीदारों को बड़ी सौगात- रेगुलर करने के आदेश किए जारी
धर्मशाला नगर निगम चुनाव 17 मई को हुए थे और 31 मई को परिणाम घोषित किए गए। इसके बावजूद शपथ ग्रहण प्रक्रिया लंबित रहने से राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता गया। अब शपथ ग्रहण की तिथि 29 जून निर्धारित की गई है, लेकिन उससे पहले एफआईआर और पुलिस जांच ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम धर्मशाला का यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि एक तरफ भाजपा समर्थित पार्षद पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला मानकर जांच आगे बढ़ा रहा है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में 64 हजार बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई- लड़कियों का आंकड़ा अधिक, शिक्षा विभाग की बढ़ी चिंता
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों से जुड़े वीडियो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उन्हें भी जांच में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल नगर निगम धर्मशाला में शपथ ग्रहण से पहले शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है और प्रदेश भर की नजरें इस मामले की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।