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August 5, 2026

हिमाचल TOLL पर फर्जी एंट्री पास का खेल बेनकाब, 9,000 बचाने के जुगाड़ में ड्राइवर- कई वाहन पकड़े

9 हजार रुपये बचाने के लिए फर्जी पास का आरोप

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Himachal  news

सोलन। हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए लागू एंट्री शुल्क व्यवस्था में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बद्दी के हिमाचल एंट्री टोल प्वाइंट पर टोल कर्मचारियों ने जांच के दौरान कई ऐसे वाहनों को रोका, जिनकी विंडस्क्रीन पर लगे एंट्री पास संदिग्ध पाए गए। प्राथमिक जांच में इन पास को कथित तौर पर फर्जी बताया गया है। मामले के बाद संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस को शिकायतें दी गई हैं।

9 हजार रुपये बचाने के लिए फर्जी पास का आरोप

दरअसल, हिमाचल में दूसरे राज्यों से आने वाली पैसेंजर कारों के लिए निर्धारित एंट्री शुल्क देना पड़ता है। जो वाहन नियमित रूप से प्रदेश में प्रवेश करते हैं, उनके मालिकों के लिए वार्षिक पास की सुविधा भी उपलब्ध है।

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मौजूदा व्यवस्था के तहत पैसेंजर कार के लिए दैनिक शुल्क 100 रुपये, जबकि वार्षिक पास की फीस 9,000 रुपये बताई गई है। नियमित रूप से बद्दी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आने-जाने वाले वाहन मालिकों के लिए वार्षिक पास सुविधाजनक विकल्प है। हालांकि, टोल कर्मियों के अनुसार कुछ वाहन चालक कथित रूप से शुल्क से बचने के लिए वाहनों पर ऐसे स्टिकर लगा रहे हैं, जो देखने में आधिकारिक पास जैसे प्रतीत होते हैं।

जांच के बाद पुलिस को दी गई शिकायत

ऐसे ही कुछ मामलों का पता बद्दी टोल प्वाइंट पर जांच के दौरान चला। कर्मचारियों को कुछ वाहनों की विंडस्क्रीन पर लगे पास की प्रामाणिकता को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद पास की बारीकी से जांच की गई और संबंधित वाहनों को रोककर मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों और पुलिस को दी गई।

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टोल प्रबंधन की ओर से सामने आए मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ बद्दी पुलिस थाना में शिकायतें दी गई हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौके पर केवल स्टिकर के आधार पर उसके वास्तविक या नकली होने की अंतिम पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

टोल कर्मचारियों को दिए गए विशेष निर्देश

जेएस इंटरप्राइजेज के प्रबंधन के अनुसार टोल प्वाइंट पर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी वाहन पर लगा पास संदिग्ध नजर आने पर उसे नजरअंदाज न किया जाए। पास की जांच कर इसकी जानकारी तत्काल कार्यालय को दी जाए और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस को शिकायत सौंपी जाए।

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प्रबंधन का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क के अनुसार पैसेंजर कारों के लिए दैनिक एंट्री फीस 100 रुपये और वार्षिक पास की राशि 9,000 रुपये है। नियमों से बचने के लिए किसी तरह की हेराफेरी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी जांच व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

बद्दी पुलिस ने भी टोल फर्म से इस तरह की शिकायतें मिलने की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार फिलहाल यह जांच का विषय है कि संबंधित वाहनों पर लगे स्टिकर वास्तव में फर्जी थे या किसी अन्य तकनीकी अथवा रिकॉर्ड संबंधी वजह से संदिग्ध नजर आए।

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इस घटना ने एंट्री पास की जांच व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस और संबंधित एजेंसियां ऐसी व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं, जिससे पास की प्रामाणिकता तुरंत जांची जा सके और शुल्क चोरी या कथित फर्जीवाड़े की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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